अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने कहा है कि किसी कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने और उसकी संपत्ति ट्रांसफर होने के बाद उसे खरीदने वाला व्यक्ति बिजली के पुराने बकाये से जुड़े विवाद को लेकर एनसीएलटी के दिवालिया अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता। ज्यूडिशियल मेंबर शम्मी खान और टेक्निकल मेंबर संजीव शर्मा की बेंच ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि संपत्ति पहले कॉरपोरेट डेटर की थी, उससे जुड़ा हर विवाद आईबीसी की धारा 60(5)(c) के तहत एनसीएलटी के दायरे में नहीं आ जाता।
मामला मेक्समॉन बिल्डवेल एलएलपी से जुड़ा है, जिसने राधा माधव कॉरपोरेशन लिमिटेड की संपत्ति खरीदी थी। कंपनी ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को पुराने बिजली कनेक्शन के बकाये के लिए 15.33 लाख रुपये का भुगतान किया था और इसी रकम की वापसी की मांग की थी। राधा माधव कॉरपोरेशन की कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) 1 अगस्त 2022 को रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होने के साथ पूरी हो गई थी। इसके बाद मेक्समॉन ने 5 जून 2024 की सेल डीड के जरिए सफल रिजॉल्यूशन आवेदक से संपत्ति खरीदी।
दिसंबर 2025 में मेक्समॉन ने अपने सब-लीसी के लिए नया बिजली कनेक्शन मांगा। इस पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन ने कॉरपोरेट डेटर के पुराने कनेक्शन के बकाये के तौर पर 15,33,793 रुपये की मांग की, जिसे मेक्समॉन ने भुगतान कर दिया। कंपनी ने एनसीएलटी में दलील दी कि रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होने से पहले की ऐसी देनदारियां, जिन्हें रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के सामने पेश नहीं किया गया या मंजूर प्लान में शामिल नहीं किया गया, आईबीसी की धारा 31 के तहत खत्म मानी जानी चाहिए। इसके साथ ही उसने रकम वापस करने और 9 फीसदी सालाना ब्याज की भी मांग की।
एनसीएलटी ने कहा कि धारा 60(5)(c) का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब विवाद का सीधा संबंध इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया से हो। इस मामले में सीआईआरपी खत्म होने के बाद मेक्समॉन ने संपत्ति खरीदी और बिजली का विवाद भी उसके बाद पैदा हुआ। बेंच ने गुजरात उर्जा विकास निगम लिमिटेड बनाम अमित गुप्ता, टाटा पावर वेस्टर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड बनाम जगन्नाथ स्पंज प्राइवेट लिमिटेड और ट्वेंटीवन शुगर लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड जैसे मामलों को अलग माना, क्योंकि उनमें बिजली बकाये का विवाद सीआईआरपी या सफल रिजॉल्यूशन आवेदक से जुड़ा था। एनसीएलटी ने मेक्समॉन की याचिका को मेंटेनेंस योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।