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‘सीधा-सीधा बोलो यार’: संजय गुप्ता ने फिल्म क्रिटिक पर साधा निशाना, ‘बंदर’ की जमकर तारीफ

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Posted On:Saturday, June 6, 2026

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने हाल ही में रिलीज हुई अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘बंदर’ को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए हैं। इन पोस्ट्स में उन्होंने न सिर्फ फिल्म और इसकी टीम की सराहना की, बल्कि फिल्म समीक्षकों के रिव्यू करने के तरीके पर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए एक नई बहस को जन्म दे दिया।

संजय गुप्ता ने अपने पहले पोस्ट में फिल्म को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ‘बंदर’ के बारे में लगातार शानदार बातें सुनने को मिल रही हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि फिल्म दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाएगी। उन्होंने अभिनेता बॉबी देओल, निर्देशक अनुराग कश्यप और फिल्म से जुड़े सभी लोगों की प्रशंसा करते हुए इसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर भी आशावाद व्यक्त किया।

हालांकि चर्चा का असली केंद्र उनकी वह टिप्पणी बनी, जिसमें उन्होंने फिल्म समीक्षकों की जटिल भाषा और गूढ़ विश्लेषण पर कटाक्ष किया। गुप्ता ने एक काल्पनिक संवाद के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि कई बार समीक्षक फिल्मों को ऐसे शब्दों में समझाने लगते हैं जो आम दर्शकों की समझ से परे होते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि दर्शक आखिरकार यही पूछते हैं—“सीधा-सीधा बोलो यार।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि फिल्म समीक्षा का मूल उद्देश्य दर्शकों को यह बताना होना चाहिए कि फिल्म मनोरंजक है या नहीं, इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले कितने प्रभावी हैं, और क्या इसे सिनेमाघर में देखने लायक माना जा सकता है। उनके अनुसार, कई समीक्षक अब फिल्म के बजाय फिल्मकार की मानसिकता और छिपे हुए संदेशों को समझने में अधिक रुचि लेते दिखाई देते हैं।

गुप्ता की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब ‘बंदर’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। क्राइम थ्रिलर शैली की यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी पेश करती है जो झूठे आरोपों, सामाजिक पूर्वाग्रहों और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों के बीच संघर्ष करता है। फिल्म में न्याय, मीडिया ट्रायल और सामाजिक धारणा जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है, जिसके चलते यह दर्शकों और समीक्षकों दोनों के बीच बहस का विषय बनी हुई है।

संजय गुप्ता की टिप्पणियों ने एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने ला दिया है कि फिल्म समीक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए। एक वर्ग का मानना है कि समीक्षकों को दर्शकों के लिए सरल और स्पष्ट राय देनी चाहिए, जबकि दूसरे पक्ष का तर्क है कि फिल्मों का गहन विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज और विचारों का प्रतिबिंब भी होता है।

फिलहाल, ‘सीधा-सीधा बोलो यार’ वाला संजय गुप्ता का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स उनकी बात से सहमत नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ लोग फिल्म समीक्षा की गहराई और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण का समर्थन कर रहे हैं। इतना तय है कि इस बहस ने ‘बंदर’ को लेकर चल रही चर्चाओं को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।


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