अहमदाबाद न्यूज डेस्क: क्या आने वाले वर्षों में भारत के बड़े शहरों में रहना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा? ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन ने इसको लेकर गंभीर चिंता जताई है। अध्ययन के मुताबिक, केवल बढ़ता तापमान ही नहीं, बल्कि शहरों की बनावट, घटती हरियाली और कमजोर बुनियादी सुविधाएं भी लोगों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।
दुनिया के 205 बड़े शहरों पर किए गए इस अध्ययन में भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया और घाना के शहरों को सबसे अधिक हीट जोखिम वाला बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरे वाले 95 प्रतिशत से अधिक शहर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उप-सहारा अफ्रीका में स्थित हैं। अध्ययन में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का विश्लेषण किया गया, जिसमें इराक का अल बसरा सबसे ज्यादा जोखिम वाला शहर पाया गया, जबकि गुजरात का अहमदाबाद दूसरे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट में भारत के 14 शहरों को सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें अहमदाबाद, जयपुर, नागपुर, पुणे, चेन्नई, मदुरै, बेंगलुरु, कानपुर और लखनऊ समेत कई प्रमुख औद्योगिक, आईटी और कारोबारी शहर शामिल हैं। अध्ययन की प्रमुख लेखिका नेथमी जयरात्ने करियावासम के अनुसार, हीटवेव का खतरा केवल अधिक तापमान से तय नहीं होता, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की स्थिति, कूलिंग सुविधाओं की उपलब्धता और शहरी ढांचे की गुणवत्ता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि एयर कंडीशनर को ही गर्मी से बचने का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर राधिका खोसला के अनुसार, पूरी दुनिया के लिए एसी पर निर्भर होना संभव नहीं है। इससे बिजली की खपत और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ेगा, जो ग्लोबल वार्मिंग को और तेज कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, बेहतर शहरी नियोजन और सभी के लिए सुलभ कूलिंग सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान देना होगा।