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जालोर की महिला के अंगदान से तीन लोगों को मिली नई जिंदगी: पति के साहसी फैसले की हो रही चर्चा

Photo Source : Google

Posted On:Sunday, May 3, 2026

अहमदाबाद न्यूज डेस्क: जालोर जिले की 35 वर्षीय मोवनदेवी बागरी के निधन के बाद उनके पति वचनारामजी ने मानवता की एक अनूठी और साहसिक मिसाल पेश की है। एक हादसे में सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। इस गहरे दुख की घड़ी में पति ने अंगदान का कठिन निर्णय लिया, जिससे तीन जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली है।

​जसवंतपुरा गांव की रहने वाली मोवनदेवी को पहले स्थानीय और फिर मेहसाणा के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद 28 अप्रैल को उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर किया गया। 30 अप्रैल को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन परिस्थिति में अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. निमेष देसाई ने परिवार को अंगदान का महत्व समझाया, जिस पर पति ने तत्काल सहमति व्यक्त कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

​अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने जानकारी दी कि गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर यह दान संपन्न हुआ। मोवनदेवी द्वारा दान किए गए एक लीवर और दो किडनी का प्रत्यारोपण सिविल मेडिसिटी कैंपस स्थित किडनी अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों में किया जाएगा। यह निर्णय चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी सफलता और मरीजों के लिए जीवनदान साबित होगा।

​अहमदाबाद सिविल अस्पताल अब तक 239 ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान का साक्षी बन चुका है, जिससे कुल 1029 अंग और ऊतक प्राप्त हुए हैं। इन आंकड़ों में सबसे अधिक 441 किडनी के साथ-साथ लीवर, हृदय, फेफड़े, छोटे आंत और नेत्र जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं। यह अस्पताल की अंगदान टीम की निरंतर जागरूकता और अंगदाताओं के परिवारों की संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि इतने लोगों को एक नई जिंदगी मिल पा रही है।


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