अहमदाबाद न्यूज डेस्क: देशभर में पुलिस कई बार संगठनों और लोगों को प्रदर्शन या धरना करने की परमिशन देने से मना कर देती है। ऐसे में कई प्रदर्शनकारी यह कहते हुए आगे बढ़ जाते हैं कि उन्हें परमिशन देने से इनकार मनमाने तरीके से किया गया है। अब यही सवाल गुजरात हाईकोर्ट के सामने है कि पुलिस किन हालात में किसी प्रदर्शन की अनुमति कानूनी तौर पर रोक सकती है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को करेगा।
मामला इस साल जुलाई का है, जब कॉकरोच जनता पार्टी का नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन चल रहा था। इसी के समर्थन में 35 साल के सुबोध कुमुद ने अहमदाबाद में करीब 50 लोगों के साथ प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। उन्होंने 17 जुलाई को पुलिस को ‘फॉर्म ए’ भेजकर 20 जुलाई को शाम 6 बजे से 8:30 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी और कहा था कि इसमें लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा। कुमुद के मुताबिक, 19 जुलाई को उन्हें एलिसब्रिज पुलिस स्टेशन बुलाकर बयान लिया गया, लेकिन उसकी कॉपी नहीं दी गई। अगले दिन पुलिस ने व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए परमिशन खारिज कर दी और ट्रैफिक व आम लोगों को होने वाली परेशानी का हवाला दिया। इसके बावजूद प्रदर्शन हुआ और प्रदर्शनकारियों को कुछ घंटों के लिए पालडी पुलिस स्टेशन में रखा गया। कुमुद के वकील ने 30 सितंबर को कोर्ट में बताया कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
कुमुद ने अपनी याचिका में कहा है कि 1975 के अहमदाबाद पुलिस नियमों के रूल 8(1) के तहत प्रदर्शन की अनुमति तभी रोकी जा सकती है, जब सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता जैसे तय आधारों पर खास तौर पर राय दर्ज की गई हो। उनका कहना है कि सिर्फ ट्रैफिक में परेशानी होने की संभावना को इन आधारों के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि ‘फॉर्म ए’ पर फैसला लेने का अधिकार पुलिस इंस्पेक्टर के पास नहीं, बल्कि डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के पास है। याचिका में मांग की गई है कि सिर्फ संभावित ट्रैफिक परेशानी के आधार पर प्रदर्शन की अनुमति न रोकी जाए, आवेदकों को पुलिस स्टेशन बुलाने से बचा जाए और कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन पर फैसला लिया जाए।
वहीं, गुजरात सरकार की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हार्दिक दवे ने याचिका का विरोध किया है। उनका कहना है कि कुमुद ने कार्यक्रम से सिर्फ तीन दिन पहले आवेदन किया था, जबकि नियमों के मुताबिक आम तौर पर कम से कम सात दिन पहले आवेदन करना होता है और कम समय में आवेदन करने पर खास वजह बतानी होती है। सरकार का यह भी कहना है कि प्रस्तावित जगह एमजे लाइब्रेरी के पास पांच सड़कें मिलती हैं, इसलिए वहां प्रदर्शन से ट्रैफिक प्रभावित होने और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी परेशानी पैदा होने की आशंका थी। राज्य ने यह भी कहा है कि मौजूदा नियम पहले से ही आवेदन और अनुमति की प्रक्रिया तय करते हैं, इसलिए भविष्य के सभी मामलों के लिए अलग से व्यापक निर्देश देने की जरूरत नहीं है।