अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में बस कंडक्टर पर एसिड अटैक के मामले में 10 साल की सजा काट रही महिला को गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने उसकी सजा पर भी फिलहाल रोक लगा दी है, क्योंकि दोषसिद्धि के खिलाफ उसकी अपील अभी लंबित है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी में बुरखा पहने व्यक्ति का चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा था और इससे यह पक्के तौर पर साबित नहीं होता कि हमला करने वाली महिला ही थी।
मामले में 42 साल की महेजबीनबानू छुवारा को अहमदाबाद सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट ने बस कंडक्टर राकेश ब्रह्मभट्ट पर एसिड फेंकने के मामले में दोषी ठहराया था। आरोप के मुताबिक, दोनों के बीच पहले संबंध थे और रिश्ता खत्म होने के बाद महिला ने कथित तौर पर रंजिश में हमला किया। 27 जनवरी 2024 की रात कालूपुर रेलवे स्टेशन के पास AMTS कंट्रोल केबिन नंबर 7 में यह घटना हुई थी। आरोप है कि महेजबीन के साथ मौजूद मीत शर्मा ने एसिड से भरा प्लास्टिक का डिब्बा उसे दिया और उसने राकेश पर एसिड फेंक दिया। हमले में राकेश की दाहिनी आंख, पीठ और शरीर के निजी हिस्से में चोटें आई थीं।
हाईकोर्ट ने जांच में कई कमियों का भी जिक्र किया। पुलिस ने कथित हमले के समय पहने गए कपड़े और दस्ताने जब्त नहीं किए थे। एसिड रखने वाला प्लास्टिक का डिब्बा भी बरामद नहीं हुआ। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कथित पुराने संबंधों को साबित करने के लिए व्हाट्सऐप चैट, फोटो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किए गए। वहीं, सीसीटीवी में बुरखा पहने व्यक्ति का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। खुद राकेश ने भी यह साफ नहीं बताया था कि फुटेज में दिख रहा व्यक्ति पुरुष था या महिला।
कोर्ट ने कहा कि इन सभी पहलुओं को देखते हुए फिलहाल आरोपी को अपराध से जोड़ने वाला स्वतंत्र और ठोस सबूत नजर नहीं आता। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इन टिप्पणियों का मतलब दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला देना नहीं है। महेजबीन करीब आठ महीने जेल में रह चुकी हैं और उनकी अपील पर जल्द सुनवाई की संभावना कम है। ऐसे में हाईकोर्ट ने अपील का अंतिम फैसला आने तक 10 साल की सजा स्थगित कर उन्हें 15 हजार रुपये के निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के एक जमानतदार की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। बिना कोर्ट की अनुमति के वह भारत से बाहर नहीं जा सकेंगी।