अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संकट सामने आया है। वर्ष 2021 में जारी राज्य सरकार की एक अधिसूचना के बाद नगर निगम के अग्निशमन विभाग की भूमिका सीमित हो गई है। स्थिति यह है कि अग्निकांड होने पर दमकलकर्मी आग बुझाने पहुंचते हैं, लेकिन उनके पास संबंधित फैक्ट्री की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने या अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने का अधिकार नहीं है।
वटवा, नारोदा और ओढव जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में किसी फैक्ट्री में आग लगने पर अहमदाबाद नगर निगम का अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंचता है, लेकिन उसके पास न तो भवन का नक्शा होता है और न ही यह जानकारी कि वहां कौन-कौन से अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं। इस कमी को दूर करने के लिए अब जीआईडीसी क्षेत्रों में निजी फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी है।
2 मई 2025 को वटवा जीआईडीसी के फेज-4 स्थित एक रासायनिक इकाई में भीषण आग लग गई थी। आग पर काबू पाने में दमकल विभाग को लगभग आठ घंटे लगे थे और दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या की जड़ वर्ष 2021 में हुए नीति परिवर्तन में है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक इकाइयों के लिए फायर एनओसी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। हालांकि कानून के अनुसार इन इकाइयों को अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाने होते हैं, लेकिन अब उनकी जांच या प्रमाणन के लिए कोई स्पष्ट प्राधिकरण नहीं बचा है।
राज्य में अग्नि सुरक्षा से जुड़ा कानून वर्ष 2013 में लागू किया गया था, जिसमें बाद के वर्षों में कई संशोधन किए गए। अधिकारियों के अनुसार जनवरी 2021 में कानून में संशोधन कर नया प्रावधान जोड़ा गया और जुलाई 2021 में जारी अधिसूचना के जरिए शहरी औद्योगिक इकाइयों को फायर एनओसी से छूट दे दी गई। इसके बाद से सुरक्षा उपकरण लगाना तो अनिवार्य है, लेकिन उनकी जांच और प्रमाणन की व्यवस्था लगभग खत्म हो गई है।
इस स्थिति का असर उद्योगों पर भी पड़ रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि निर्यात के दौरान विदेशी खरीदार फायर एनओसी की मांग करते हैं। चूंकि अब ऐसी व्यवस्था नहीं है, इसलिए कंपनियों को सरकारी अधिसूचनाएं दिखाकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। इसके अलावा, किसी दुर्घटना के बाद बीमा दावों के निपटारे में भी कठिनाइयां सामने आती हैं।
औद्योगिक संगठनों ने मांग की है कि फायर एनओसी प्रणाली को फिर से लागू किया जाए या कम से कम स्वयं-घोषणा और स्पष्ट दिशानिर्देशों की व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि नियमित निरीक्षण और निगरानी के बिना कई इकाइयां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही हैं, जिससे बड़े हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।