अहमदाबाद न्यूज डेस्क: फेशियल रिकग्निशन आधारित *डिजी यात्रा* ऐप जुड़वां यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। अहमदाबाद के जुड़वां कारोबारी संजीव और राजीव छाजेर का कहना है कि जब भी वे साथ में हवाई यात्रा करते हैं, सिस्टम उनके चेहरे में अंतर नहीं कर पाता। नतीजतन, दोनों में से किसी एक को फास्ट-ट्रैक लेन छोड़कर मैनुअल पहचान सत्यापन कराना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए दोनों भाइयों ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थायी व्यवस्था की मांग की है।
संजीव छाजेर ने बताया कि 10 जुलाई को अहमदाबाद से दिल्ली की यात्रा के दौरान डिजी यात्रा से चेक-इन करते समय दोनों भाइयों को *"Too Many Access"* का संदेश मिला। सिक्योरिटी चेकपॉइंट पर भी यही समस्या दोबारा सामने आई और स्टाफ ने दोनों में से एक को मैनुअल वेरिफिकेशन के लिए भेज दिया। उनका कहना है कि डिजी यात्रा का उद्देश्य लंबी कतारों से बचाकर समय बचाना है, लेकिन हर बार ऐसी दिक्कत आने से इसका फायदा खत्म हो जाता है। उनका मानना है कि सिस्टम एक जैसे चेहरों को डुप्लिकेट एंट्री मान लेता है।
छाजेर बंधुओं ने मंत्रालय से आग्रह किया है कि फेशियल रिकग्निशन एल्गोरिदम की समीक्षा कर जुड़वां लोगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और पहचान संबंधी व्यवस्था विकसित की जाए। उनका कहना है कि यदि सिस्टम में सुधार नहीं किया गया तो एक जैसे चेहरे वाले यात्रियों को हर बार अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं, एयरपोर्ट से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह मामला अब मंत्रालय स्तर पर तकनीकी समाधान की मांग करता है।
यह समस्या केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। अहमदाबाद की 24 वर्षीय जुड़वां बहनें केया और हिया पटेल ने भी बताया कि जब वे साथ यात्रा करती हैं तो डिजी यात्रा अक्सर उनकी पहचान सत्यापित नहीं कर पाती। उनकी मां तृप्ति पटेल के अनुसार, इसी वजह से दोनों बहनें कई बार डिजी यात्रा का इस्तेमाल ही नहीं करतीं और मैनुअल जांच का सहारा लेती हैं। हालांकि, अलग-अलग यात्रा करने पर उन्हें ऐसी कोई समस्या नहीं होती। उन्होंने भी अधिकारियों से सिस्टम को बेहतर बनाने की मांग की है।