अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऑनलाइन राइड सर्विस के खिलाफ ऑटो और टैक्सी चालकों का ‘रोजगार बचाओ’ आंदोलन तेज हो गया है। शहर में करीब 3.7 लाख ऑटो और टैक्सी चालक इस विरोध से जुड़े बताए जा रहे हैं। कई यूनियनों ने सोमवार से 10 सितंबर तक चार दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। हालांकि, हड़ताल का असर शहर में एक जैसा नहीं दिखा और कई इलाकों में ऑटो-टैक्सी चलते नजर आए।
हड़ताल को लागू कराने के लिए यूनियन के सदस्य अलग-अलग जगहों पर पहुंचे। इसी दौरान रानीप बस स्टेशन के पास विवाद हो गया, जहां एक ऑटो चालक पर डंडा लेकर पहुंचने और यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने का आरोप है। यात्री मणिबेन ने बताया कि उन्हें सफर के बीच में ही ऑटो से उतरना पड़ा और अब उन्हें पैदल काम पर जाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हड़ताल चार दिन चली तो आम लोगों को काफी परेशानी होगी। घटना के बाद पुलिस आरोपी चालक की तलाश कर रही है।
ऑटो चालकों का कहना है कि ऑनलाइन ऐप और दोपहिया टैक्सी सेवाओं से उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है। चालक आशीष गामिती ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तय किराए के हिसाब से भी उन्हें पर्याप्त कमाई नहीं हो रही है, जबकि गैस समेत दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। एक अन्य चालक इंद्रविजय सिंह वाघेला ने दावा किया कि ऑनलाइन ऐप पर कई बार सरकार के तय किराए से काफी कम रकम दिखाई जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफेद नंबर प्लेट वाले दोपहिया वाहनों से टैक्सी सेवा चलाने पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लगाई गई है।
यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर 27 अगस्त को गांधीनगर में परिवहन आयुक्त को ज्ञापन दिया था और 28 अगस्त से ऑटो के पीछे पोस्टर लगाकर विरोध शुरू किया था। उनका कहना है कि प्रशासन से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद हड़ताल का फैसला लिया गया। यूनियनों की मांग है कि ऐप के जरिए चल रही कथित अवैध दोपहिया टैक्सी सेवाओं पर रोक लगे और किराया सरकार के तय नियमों के अनुसार लागू किया जाए। हालांकि, छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा को देखते हुए स्कूल वैन और स्कूल ऑटो को हड़ताल से बाहर रखा गया है। आपातकालीन सेवाओं को भी जारी रखने की अपील की गई है।