अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद के शिलाज इलाके में स्थित आनंद निकेतन स्कूल मंगलवार को उस समय विवादों में आ गया, जब एक छात्र के लंच में कथित तौर पर कांच का टुकड़ा मिलने के बाद अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। मामला सामने आने के बाद अहमदाबाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी कर घटना पर विस्तृत जवाब मांगा है।
छात्र के परिवार के मुताबिक, कक्षा 8 का छात्र सोमवार को स्कूल में लंच कर रहा था। खाने में भिंडी, दाल, रोटी और चावल थे। खाना खाते समय छात्र को मुंह में कुछ कठोर महसूस हुआ और कथित तौर पर उसने कांच का टुकड़ा निगल लिया। इसके बाद उसने शिक्षक को इसकी जानकारी दी।
छात्र के पिता मलव शाह का आरोप है कि बच्चे को स्कूल की इंफर्मरी ले जाने के बजाय सीधे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कथित कांच के टुकड़े की जांच की जरूरत बताई, ताकि यह पता चल सके कि बच्चे को अंदरूनी चोट या ब्लीडिंग का खतरा है या नहीं और एंडोस्कोपी की जरूरत पड़ेगी या नहीं।
पिता का आरोप है कि बार-बार मांगने के बावजूद स्कूल ने उन्हें कांच का टुकड़ा नहीं सौंपा। उनका कहना है कि गलती हो सकती है, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले को जिस तरह संभाला, वह गंभीर चिंता का विषय है। मंगलवार को कई अभिभावक स्कूल के बाहर जमा हुए और खाने की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगा।
स्कूल ने किए सुधार के दावे
विवाद बढ़ने के बाद स्कूल प्रबंधन ने कहा कि घटना के तुरंत बाद सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। निगरानी की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है और स्कूल की हाइजीन, फूड सेफ्टी और क्वालिटी कंट्रोल व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
हालांकि, स्कूल ने अपने परिसर में अभिभावकों के कथित अनधिकृत जमावड़े पर भी चिंता जताई और कहा कि इस तरह की स्थिति छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
DEO ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अहमदाबाद DEO ने स्कूल को नोटिस जारी कर खाने के स्रोत, भोजन परोसे जाने से पहले किए गए क्वालिटी चेक, घटना के तुरंत बाद उठाए गए कदम और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी है।
शिक्षा विभाग ने स्कूल का निरीक्षण करने, सीसीटीवी फुटेज की जांच करने, उपलब्ध सबूत जुटाने और छात्रों व अभिभावकों के बयान लेने के भी निर्देश दिए हैं।
किताबों और धार्मिक भेदभाव को लेकर भी विवाद
प्रदर्शन के दौरान कुछ अभिभावकों ने स्कूल पर एक खास धर्म के प्रति भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और जर्मन डायरी लेखिका ऐन फ्रैंक की किताबें पढ़ना अनिवार्य किया गया है।
स्कूल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये किताबें बुक क्लब का हिस्सा हैं और छात्रों में उम्र के हिसाब से पढ़ने की आदत, सहानुभूति, सोचने की क्षमता और वैश्विक समझ विकसित करने के लिए शामिल की गई हैं। स्कूल ने यह भी कहा कि छात्रों के रूटीन में फिजिकल एक्सरसाइज, योग और नाश्ते व लंच के दौरान श्लोक पाठ जारी है।
'मेंटल हेल्थ ब्रेक' वाले मैसेज से भी हुआ भ्रम
विवाद के बीच स्कूल की ओर से अभिभावकों को एक मैसेज भेजा गया, जिसमें कुछ अभिभावकों द्वारा कथित उत्पीड़न के बाद शिक्षकों के 'मेंटल हेल्थ ब्रेक' पर जाने की बात कही गई थी। करीब एक घंटे के भीतर यह मैसेज वापस ले लिया गया।
बाद में स्कूल ने नया मैसेज जारी कर बताया कि कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई सामान्य रूप से चलेगी, जबकि प्राइमरी सेक्शन बुधवार को बंद रहेगा। स्कूल के प्रवक्ता के मुताबिक, पहला मैसेज मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की पहुंच रखने वाले एक शिक्षक से गलती से भेजा गया था और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।