अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में मलाला यूसुफजई की किताब ‘आई एम मलाला’ को पढ़ने को लेकर विवाद बढ़ गया। कुछ दिन पहले एक स्कूल में इस किताब को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद 27 तारीख को सिटिजन ऑफ जस्टिस एंड पीस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बोडकदेव के सरकारी गार्डन में किताब पढ़ने का कार्यक्रम रखा। इसकी जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और कार्यक्रम का विरोध करने लगे।
बजरंग दल नेता ज्वलित मेहता ने कहा कि मलाला कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानती हैं, इसलिए उनकी किताब नहीं पढ़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे ऐसी किताब पढ़ने से लोगों को रोकेंगे। उनका आरोप है कि स्कूल में विवाद के बाद किताब पढ़ाना बंद कर दिया गया था, लेकिन अब कांग्रेस और सिटिजन ऑफ जस्टिस एंड पीस इसे दोबारा लोगों के बीच पढ़ा रहे हैं।
वहीं, कार्यक्रम के आयोजकों ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि करीब 30-40 लोग केसरिया स्कार्फ पहनकर वहां पहुंचे थे और उनके पास लाठियां, लोहे की छड़ें और बेसबॉल बैट जैसे सामान थे। सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध परमार ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं ने बातचीत के बजाय धमकी और बदसलूकी शुरू कर दी। दूसरी तरफ बजरंग दल का कहना है कि आयोजकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें ‘आतंकवादी’ बताया था, जिसके बाद विवाद बढ़ा।
मामले की सूचना मिलने पर वस्त्रापुर पुलिस मौके पर पहुंची। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच बहस और हाथापाई दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले में 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है और घटना की जांच की जा रही है।