अहमदाबाद न्यूज डेस्क: भरूच जिले के हांसोट तालुका के अलवा गांव के 22 वर्षीय अतुल भावेशभाई पटेल ने दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी कई लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दे दी। सड़क हादसे के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए अतुल के अंगों का सफलतापूर्वक दान किया गया। इस दौरान देश में पहली बार किसी अंग प्रत्यारोपण के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष स्टॉपेज दिया गया, ताकि उनका दिल तय समय में अहमदाबाद पहुंचाया जा सके।
अतुल अंकलेश्वर की एक निजी कंपनी में हेल्पर के तौर पर काम करते थे। 29 जुलाई को ड्यूटी से लौटते समय उनका गंभीर सड़क हादसा हो गया। उन्हें तत्काल अंकलेश्वर के जयाबेन मोदी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। 1 अगस्त को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
दुख की इस घड़ी में अस्पताल और डोनेट लाइफ संस्था की टीम ने परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में बताया। इसके बाद अतुल की मां रंजनबेन, भाई दीपक और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके अंग दान करने का फैसला लिया। मां ने कहा कि अगर बेटे के अंगों से किसी की जिंदगी बच सकती है, तो इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं हो सकता।
अंगदान की प्रक्रिया के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अतुल के दिल को समय पर अहमदाबाद पहुंचाने की थी। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस को अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर विशेष स्टॉपेज दिया। अस्पताल से स्टेशन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और दिल को सुरक्षित तरीके से ट्रेन के जरिए अहमदाबाद भेजा गया, जहां 25 वर्षीय एक मरीज का हृदय प्रत्यारोपण किया जाएगा।
इसके अलावा दूसरा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अतुल का लीवर, दोनों किडनी और अग्न्याशय अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी भेजे गए, जहां अलग-अलग मरीजों का प्रत्यारोपण किया जाएगा। उनकी आंखें भी अंकलेश्वर की जी.सी. नाहर रोटरी आई बैंक को दान की गईं।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में डोनेट लाइफ संस्था, डॉक्टरों की टीम, भरूच जिला पुलिस, रेलवे प्रशासन और कई सरकारी अधिकारियों ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समयबद्ध समन्वय और ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था से अंगों को बिना देरी गंतव्य तक पहुंचाया जा सका।
अतुल पटेल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका अंगदान कई लोगों के लिए नई जिंदगी की सौगात बन गया। वहीं, वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष स्टॉपेज देकर दिल को समय पर पहुंचाने की यह पहल देश में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक नई मिसाल बन गई।