अहमदाबाद न्यूज डेस्क: भारत के तेजी से बढ़ते शहरों पर अब जलवायु परिवर्तन का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। क्लाइमेट इंटेलिजेंस कंपनी अल्फाजियो की मार्च 2026 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 72 बड़े शहरों में अहमदाबाद और कोलकाता सबसे ज्यादा जलवायु जोखिम वाले शहरों में शामिल हैं। रिपोर्ट में गर्मी, बाढ़, सूखा और जंगल की आग जैसे खतरों के साथ यह भी देखा गया कि शहरों में मौजूद बचाव और अनुकूलन की व्यवस्थाएं इन जोखिमों को कितना कम कर पा रही हैं।
रिपोर्ट के 'रेजिलिएंस-एडजस्टेड रिस्क' यानी अनुकूलन के बाद बचे जलवायु जोखिम के आधार पर अहमदाबाद दुनिया में सबसे ज्यादा जोखिम वाले शहर के तौर पर सामने आया। उसका स्कोर पाकिस्तान के हैदराबाद के बराबर 41 रहा। कोलकाता 35 के स्कोर के साथ छठे स्थान पर है। भारत के बेंगलुरु को 12वां और चेन्नई को 15वां स्थान मिला। सबसे ज्यादा जोखिम वाले छह शहरों में अहमदाबाद और कोलकाता के अलावा पाकिस्तान के हैदराबाद और लाहौर, बांग्लादेश की राजधानी ढाका और पाकिस्तान का मुल्तान शामिल हैं। यानी इस सूची के सभी शीर्ष छह शहर दक्षिण एशिया में हैं।
भारत में जलवायु का असर लगातार महसूस किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 2024 देश में 1901 के बाद से सबसे गर्म साल रहा और औसत भूमि सतह का तापमान 1991-2020 के औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। शहरों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि घनी इमारतें, कम हरियाली और कमजोर जलनिकासी गर्मी और तेज बारिश के असर को बढ़ा सकते हैं। विश्व बैंक की 2025 की 24 भारतीय शहरों की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि शहरों के फैलाव के साथ अत्यधिक गर्मी और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। शहरी गर्मी के कारण शहर आसपास के इलाकों की तुलना में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकते हैं।
हालांकि, भारत के पास तैयारी के लिए अभी भी मौका है। कई शहरों में हीट एक्शन प्लान, बाढ़ प्रबंधन और क्लाइमेट रेजिलिएंस की योजनाओं पर काम चल रहा है। अहमदाबाद में भी क्लाइमेट रेजिलिएंट सिटी एक्शन प्लान लागू है। लेकिन असली चुनौती तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और उसी रफ्तार से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की है। अल्फाजियो की रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि भारतीय शहर जलवायु संकट से निपटने में असमर्थ हैं, बल्कि यह बताती है कि शहरों पर बढ़ते खतरे और उनसे निपटने की मौजूदा क्षमता के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।