अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अमेरिका ने भारतीय गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के गिरोह से जुड़े नीतीश कौशल को एफबीआई की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल कर लिया है। इसके साथ ही अमेरिकी न्याय विभाग, एफबीआई, कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) और यूरोप की कई एजेंसियों ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह समेत तीन अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेटों के खिलाफ संयुक्त अभियान *'ऑपरेशन हार्ड बॉल'* शुरू किया है।
अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में रहते हुए भी अपने गिरोह का संचालन कर रहा है। आरोपपत्र के अनुसार, गोल्डी बरार उत्तरी अमेरिका और रोहित गोदारा यूरोप में गिरोह की गतिविधियों को संभालते थे। अमेरिका का यह भी दावा है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगियों का नाम कनाडा में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भी सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला संबंधित अदालतों में होना बाकी है।
फिलहाल लॉरेंस बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच बंद है। गृह मंत्रालय द्वारा लागू विशेष कानूनी प्रावधानों के तहत उसकी जेल से आवाजाही पर रोक है। यही वजह है कि किसी भी राज्य की पुलिस या जांच एजेंसी को उससे पूछताछ के लिए साबरमती जेल जाना पड़ता है या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सहारा लेना होता है।
इस बीच चर्चा तेज है कि यदि अमेरिका लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करता है तो भारत क्या करेगा। भारत और अमेरिका के बीच 1997 में प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन किसी भी आरोपी को सौंपना अनिवार्य नहीं होता। ऐसी स्थिति में अमेरिका को औपचारिक अनुरोध भारत सरकार को भेजना होगा, जिसके बाद विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और भारतीय अदालतें संधि की शर्तों के आधार पर मामले की समीक्षा करेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा। भारत चाहे तो यह भी तय कर सकता है कि लॉरेंस बिश्नोई पहले भारत में लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया और सजा पूरी करेगा, उसके बाद ही प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा। इससे पहले भी वॉरेन एंडरसन, डेविड हेडली और तहव्वुर राणा जैसे मामलों में प्रत्यर्पण को लेकर अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई गई थीं।