अहमदाबाद न्यूज डेस्क: गुजरात उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता प्रगति अहीर (Pragati Aahir) के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह एफआईआर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजकोट जिले की एक नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान कथित रूप से उजागर करने के मामले में दर्ज की गई थी।
हालांकि प्रगति अहीर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता की तस्वीर को धुंधला (Blur) कर दिया था, लेकिन पोस्ट में दिख रहे आसपास के माहौल, निवास स्थान के लैंडमार्क और पीड़िता के रिश्तेदारों की तस्वीरों के कारण उसकी पहचान उजागर होने की बात सामने आई।
मामले का विवरण और पृष्ठभूमि
घटना की पृष्ठभूमि: याचिका के अनुसार, अहीर ने 6 वर्षीय बच्ची के साथ 13 लोगों द्वारा कथित यौन शोषण का मामला उठाया था और परिवार को कानूनी सहायता देने उनके घर गई थीं। इस दौरान उन्होंने फेसबुक पर एक लिखित पोस्ट के साथ तस्वीरें और वीडियो क्लिप अपलोड किए थे।
पुलिस की कार्रवाई: अतकोट पुलिस (Atkot Police) ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। पुलिस का आरोप था कि चेहरे धुंधले होने के बावजूद पीड़िता के घर, इलाके और रिश्तेदारों के चेहरे दिखने से उसकी पहचान उजागर हो गई, जो प्रचार के लिए किया गया था।
याचिकाकर्ता का तर्क: अहीर ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि पोस्ट में बच्ची का नाम, पता या व्यक्तिगत विवरण नहीं था और फोटो धुंधला करना उनकी नेक मंशा को दर्शाता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल आसपास का क्षेत्र दिखने से सीधा या अप्रत्यक्ष खुलासा नहीं होता।
अभियोजन पक्ष का रुख: अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि घर के आसपास के लैंडमार्क और परिजनों की तस्वीरें दिखाने से बच्ची की पहचान उजागर होती है, जो उसकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है और उसे खतरे में डाल सकती है।
उच्च न्यायालय का फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एम. के. ठक्कर (Justice M K Thakker) ने स्पष्ट किया कि कानून किसी भी ऐसी रिपोर्ट, टिप्पणी या तस्वीर के प्रकाशन पर रोक लगाता है जो किसी बच्चे की निजता या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामला बनता है, जिसकी सुनवाई अदालत में होना आवश्यक है। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने अपने अंतर्निहित क्षेत्राधिकार का उपयोग करते हुए एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।