अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सिविल डिफेंस होम गार्ड्स में तैनात 45 वर्षीय महिला पुलिस इंस्पेक्टर से ठगों ने 5.4 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को एक इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताकर उन्हें फोन किया और बंद हो चुकी बीमा पॉलिसियों की रकम और मैच्योरिटी अमाउंट दिलाने का झांसा दिया। महिला अधिकारी ने 27 अगस्त को गुजरात यूनिवर्सिटी थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत के मुताबिक, ठगी की शुरुआत 11 अगस्त को एक अनजान नंबर से आए फोन के साथ हुई। कॉल करने वाले ने खुद को इंश्योरेंस कंपनी के दिल्ली मुख्यालय का कर्मचारी बताया और महिला की दो बीमा पॉलिसियों की सही जानकारी देकर भरोसा जीत लिया। उसने दावा किया कि किसी एजेंट ने पॉलिसी की 80 प्रतिशत रकम के लिए क्लेम कर दिया है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके बाद उसने उनकी ओर से शिकायत दर्ज कराने की बात कही और मैसेज के जरिए एक शिकायत नंबर भी भेजा।
अगले दिन दूसरे शख्स ने खुद को कंपनी का मैनेजर बताया और कहा कि महिला ने पॉलिसियों के प्रीमियम के तौर पर 10.8 लाख रुपये जमा किए हैं, जिस पर 8.7 लाख रुपये ब्याज बन चुका है। उसने दावा किया कि पॉलिसी बंद करने पर कुल 19.5 लाख रुपये वापस मिल सकते हैं। इसके लिए पहले 99,227 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर मांगे गए। महिला ने QR कोड और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए यह रकम कई किस्तों में भेज दी। इसके बाद 18 अगस्त को ठगों ने GST के नाम पर 4.4 लाख रुपये और मांगे और रकम वापस मिलने का भरोसा दिया। महिला ने 50 हजार रुपये QR कोड और 3.9 लाख रुपये दो बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए 19 और 20 अगस्त को भेज दिए।
24 अगस्त को एक अन्य ठग ने खुद को इंश्योरेंस मैनेजर बताते हुए कहा कि पॉलिसी की रकम बढ़कर 24.9 लाख रुपये हो गई है और जल्द ही खाते में जमा हो जाएगी। लेकिन इसके बाद उसने रकम जारी करने के लिए इंश्योरेंस ई-अकाउंट खोलने और उसमें 5.1 लाख रुपये रखने की नई शर्त रख दी। इस मांग पर महिला अधिकारी को शक हुआ और उन्होंने 25 अगस्त को साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क किया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और उन बैंक खातों व फोन नंबरों की भी जांच की जा रही है, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई।