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अहमदाबाद मर्डर मिस्ट्री: डायरी के राज और गायब गोलियों ने उलझाई दो बहनों की मौत की गुत्थी, FSL रिपोर्ट का इंतजार

Photo Source : Google

Posted On:Tuesday, April 14, 2026

अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद के चांदखेड़ा में दो मासूम बच्चियों की मौत का मामला अब एक पेचीदा कानूनी और वैज्ञानिक पहेली बन गया है। घटना के दस दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस यह तय नहीं कर पा रही है कि यह सिर्फ फूड पॉइजनिंग का मामला है या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश है। माता-पिता, विमल और भावना, लगातार यह दावा कर रहे हैं कि डेयरी से लाए गए डोसा बैटर को खाने के बाद ही पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ी, लेकिन पुलिस इस थ्योरी पर पूरी तरह यकीन नहीं कर पा रही है।

​जांच के दौरान भावना की एक निजी डायरी मिली है, जिसने इस केस में एक नया मनोवैज्ञानिक पहलू जोड़ दिया है। डायरी के पन्नों से पता चलता है कि वह पुत्र प्राप्ति की तीव्र इच्छा रखती थीं और अपने परिवार को पूरा करने के लिए मानसिक दबाव में थीं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सिर्फ डायरी के आधार पर उन्हें अपराधी नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर है कि क्या इस मानसिक स्थिति का असर उनके बच्चों पर पड़ा।

​मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है। विमल और भावना के खून के नमूनों में एल्युमीनियम फॉस्फाइड और जस्ता (जिंक) जैसे जहरीले रसायनों के अंश मिले हैं, जो आमतौर पर अनाज को सुरक्षित रखने वाली दवाओं में पाए जाते हैं। घर की तलाशी के दौरान कीटनाशक की आठ गोलियां मिली हैं, जबकि विमल ने दस गोलियां खरीदने की बात स्वीकार की है। गायब हुई दो गोलियों ने पिता को भी संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

​अब पूरी जांच का केंद्र बिंदु दोनों मृत बच्चियों, राहा और मिस्टी की एफएसएल (FSL) रिपोर्ट है। पुलिस को उम्मीद है कि अगले तीन से चार दिनों में यह रिपोर्ट आ जाएगी, जिससे स्पष्ट होगा कि बच्चियों की मौत किस रसायन से हुई। इस रिपोर्ट का मिलान माता-पिता की मेडिकल फाइलों से किया जाएगा और डॉक्टरों की विशेषज्ञ राय लेने के बाद ही पुलिस किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगी कि यह एक दुखद हादसा था या फिर सामूहिक हत्या का प्रयास।


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