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तेल कंपनियों पर बढ़ा भारी दबाव, रोज 1,700 करोड़ रुपये तक का घाटा

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Posted On:Monday, May 11, 2026

वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय ग्राहकों को राहत देने की बड़ी कीमत देश की सरकारी तेल कंपनियां चुका रही हैं। पिछले 10 हफ्तों के आंकड़ों पर गौर करें तो इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को कुल मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

रोजाना 1,700 करोड़ रुपये का घाटा

सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में भारी 'अंडर-रिकवरी' (Under-recovery) का सामना कर रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल जिस महंगी दर पर खरीद रही हैं, उसकी तुलना में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल काफी सस्ते दाम पर बेच रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों का सामूहिक घाटा 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

कच्चा तेल 50% महंगा, पर दाम स्थिर

पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% का उछाल आया है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब दो साल पुराने स्तर पर ही स्थिर हैं।

  • पेट्रोल: ~94.77 रुपये प्रति लीटर

  • डीजल: ~87.67 रुपये प्रति लीटर

  • LPG: हालांकि मार्च में रसोई गैस के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे, लेकिन यह भी अभी लागत मूल्य से काफी पीछे है।

कर्ज के जाल और प्रोजेक्ट्स पर संकट

लगातार होते इस घाटे का असर अब कंपनियों की आर्थिक सेहत पर दिखने लगा है।

  1. वर्किंग कैपिटल: कच्चा तेल खरीदने और रिफाइनरी चलाने के लिए अब कंपनियों को बाजार से भारी कर्ज उठाना पड़ सकता है।

  2. प्रोजेक्ट्स में देरी: यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो तेल कंपनियों को अपने भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा में बदलाव करना पड़ सकता है।

  3. सरकार की प्राथमिकता: घाटे के बावजूद, सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग, बायोफ्यूल और ऊर्जा सुरक्षा जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही है ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच ये कंपनियां कब तक खुद को इस भारी घाटे से बचाकर ग्राहकों को सस्ती ऊर्जा मुहैया करा पाएंगी।


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