अहमदाबाद न्यूज डेस्क: सुरेंद्रनगर में सूदखोरों के जाल में फंसे पूजाबेन परमार और उनके पति अनिल भाई की आपबीती किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। उन्होंने एक छोटी सी जरूरत पूरी करने के लिए महज तीन लाख रुपये उधार लिए थे, लेकिन इस कर्ज ने उनके जीवन को एक अंतहीन चक्र में फंसा दिया। उन्होंने सूदखोरों को 18 लाख रुपये नकद और 40 तोला सोना (जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये थी) चुका दिया, इसके बावजूद सूदखोरों की हवस शांत नहीं हुई और वे परिवार से अतिरिक्त 18 से 20 लाख रुपये की मांग कर उन्हें निरंतर प्रताड़ित कर रहे थे।
कर्ज की इस भीषण मार और प्रताड़ना के कारण इस परिवार का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। हालात इतने बदतर हो गए कि उन्हें अपना थानगढ़ स्थित पुश्तैनी मकान तक खोना पड़ा और विवश होकर उन्हें मुंबई पलायन करना पड़ा। सूदखोरों ने न केवल उनके वित्तीय शोषण को जारी रखा, बल्कि उनके घर पर भी अवैध कब्जा जमा लिया था। तीन साल से जारी इस मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया था।
जब पीड़ित दंपति ने थक-हारकर अपनी शिकायत पुलिस अधीक्षक प्रेमसुख डेलू के समक्ष रखी, तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए फौरन एक्शन लिया। एसपी के निर्देश पर लोकल क्राइम ब्रांच और एडिविजन पुलिस की टीमों ने महज पांच घंटे के भीतर ऑपरेशन पूरा किया। पुलिस ने न केवल आरोपियों के चंगुल से उनके गहने बरामद किए, बल्कि उनके पुश्तैनी मकान के ताले तोड़कर उन्हें उनका घर वापस सौंपा और उन्हें सूदखोरों के आतंक से मुक्ति दिलाई।
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से पूजाबेन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भावुक होकर बताया कि अब वह राहत की सांस ले पा रही हैं और अपने भाई की शादी में बिना किसी डर के अपने गहने पहनकर जा सकेंगी। पुलिस ने जिस तरह से सूदखोरों के चंगुल से परिवार को न्याय दिलाया, वह सुरेंद्रनगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि समय पर की गई पुलिसिया पहल पीड़ित को एक नई जिंदगी और सम्मान वापस दिला सकती है।