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ईरानी परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका: उपग्रह चित्रों ने पुख्ता किए छह से अधिक गोपनीय केंद्रों के विनाश के दावे

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Posted On:Saturday, May 9, 2026

तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने ईरान के परमाणु भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। वाशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक-टैंक 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' ने ताजा सैटेलाइट इमेजिंग के आधार पर दावा किया है कि अमेरिकी और इजरायली वायु सेना के हालिया हमलों में ईरान के कम से कम छह प्रमुख परमाणु स्थलों को मलबे में तब्दील कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से अधिकांश ठिकाने ऐसे थे जहाँ ईरान अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचकर परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में गोपनीय शोध कर रहा था।

हथियार डिजाइन केंद्रों पर सर्जिकल प्रहार

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों की रणनीति केवल यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की हथियार बनाने की तकनीकी क्षमता (Weaponization Path) को खत्म करना था।

  • मिन-जदयी का खुलासा: पहली बार तेहरान के पूर्व में स्थित 'मिन-जदयी' नामक एक गुप्त परिसर की पहचान हुई है, जहाँ वैज्ञानिक परमाणु हथियार प्रणाली के प्रमुख घटकों पर काम कर रहे थे। तस्वीरों में यहाँ की तीन मुख्य इमारतें पूरी तरह जमींदोज दिखाई दे रही हैं।

  • परचिन और तालेघन-2: सैन्य परिसर 'परचिन' के भीतर स्थित 'तालेघन 2' को भी निशाना बनाया गया है, जिसे उच्च विस्फोटकों के परीक्षण के लिए जाना जाता था। इसके अलावा लविज़न-2 और इमाम हुसैन विश्वविद्यालय जैसे शोध केंद्र भी इस हमले की जद में आए हैं।

ईंधन बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक नेतृत्व को क्षति

हमलों ने न केवल शोध केंद्रों को, बल्कि ईरान के व्यापक परमाणु ईंधन चक्र जैसे अराक भारी जल संयंत्र और अरदकान येलोकेक उत्पादन केंद्र को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है।

  1. वैज्ञानिकों का नुकसान: अपुष्ट खबरों के अनुसार, ईरान के सैन्य अनुसंधान संगठन (SPND) से जुड़े कई चोटी के परमाणु वैज्ञानिक भी इन हमलों में मारे गए हैं, जिससे इस कार्यक्रम को रणनीतिक रूप से अपूरणीय क्षति हुई है।

  2. यूरेनियम भंडार का रहस्य: व्यापक विनाश के बावजूद, संस्थान का मानना है कि नतांज और इस्फ़हान की गहरी भूमिगत सुरंगों में ईरान का 60 प्रतिशत शुद्धता वाला लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम भंडार अब भी सुरक्षित हो सकता है, जिसे ईरान ने पहले ही सील कर दिया था।

इन हमलों ने ईरान के परमाणु मंसूबों को दशकों पीछे धकेल दिया है, लेकिन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि भूमिगत सुरंगों में छिपी क्षमता अब भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने वर्तमान में इन स्थलों तक पहुंच न होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।


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