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‘और ज्यादा टैरिफ लगा दूंगा अगर…’, क्या है डिजिटल सर्विस टैक्स? जिसे लेकर ट्रंप ने दुनिया को धमकाया

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Posted On:Friday, August 29, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। इस बार मामला डिजिटल सर्विस टैक्स को लेकर है, जिसे लेकर ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका की टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाएगा, उसके निर्यात पर और ज्यादा टैरिफ लगा दिए जाएंगे। यह धमकी उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर दी, जिससे यह साफ हो गया कि ट्रंप एक बार फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को आक्रामक रूप में लागू करने की राह पर हैं।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत समेत कई देश अमेरिका के बढ़ते टैरिफ के खिलाफ प्रतिक्रिया देने पर विचार कर रहे हैं। भारत, जिसने पहले डिजिटल सर्विस टैक्स यानी 'इक्विलाइजेशन लेवी' लगाया था, वह ट्रंप की धमकी के बावजूद दोबारा इसे लागू कर सकता है। साल 2016 में शुरू किया गया यह टैक्स पहले 6% था और बाद में 2% ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन पर लगाया गया था। हालांकि, अमेरिका के साथ ट्रेड डील को सुचारू बनाने के लिए भारत ने इसे 2025-26 के बजट में समाप्त कर दिया था। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदलती दिख रही हैं।

अगर भारत अमेरिका के 50% टैरिफ का जवाब देना चाहे, तो डिजिटल सर्विस टैक्स दोबारा लागू करना एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट, मेटा (फेसबुक), अमेजन और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियाँ भारत में अरबों रुपये का कारोबार कर रही हैं, जबकि इनकी कोई भौतिक उपस्थिति (ब्रांच, ऑफिस या फैक्ट्री) भारत में नहीं है। ऐसे में डिजिटल टैक्स लगाकर भारत इन कंपनियों से कर वसूली कर सकता है।

डिजिटल सर्विस टैक्स का सिद्धांत सरल है—अगर कोई अंतरराष्ट्रीय कंपनी किसी देश में बिना वहां की भौतिक उपस्थिति के कमाई कर रही है, तो उस देश को उस पर टैक्स लगाने का अधिकार है। यही कारण है कि ट्रंप की धमकियों के बावजूद कई देश डिजिटल टैक्स पर विचार कर चुके हैं। हालांकि, पहले कनाडा और यूरोपीय संघ के कुछ देशों ने इस टैक्स को लागू किया था, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते उन्हें इसे वापस लेना पड़ा।

भारत अब एक अहम मोड़ पर खड़ा है। ट्रंप की टैरिफ नीति भारत को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है, क्योंकि भारत पर सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया गया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक डिजिटल टैक्स पर दोबारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन व्यापार और टैक्स नीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अमेरिका की तरफ से टैरिफ में और बढ़ोतरी होती है, तो भारत के पास डिजिटल टैक्स को दोबारा लागू करने का मजबूत आधार होगा।

यह भी दिलचस्प है कि अमेरिका के भीतर भी ट्रंप की टैरिफ नीति की आलोचना हो रही है। अमेरिकी संसद के कुछ सदस्यों ने इसे 'अवांछनीय और नुकसानदायक' बताया है, खासकर भारत जैसे उभरते व्यापारिक साझेदार को टारगेट करना।

अंततः, यह टैरिफ और टैक्स का टकराव केवल आर्थिक न होकर राजनीतिक भी बन गया है, जिसमें शक्ति प्रदर्शन और राष्ट्रहित दोनों की टकराहट देखी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस


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