अहमदाबाद न्यूज डेस्क: शहर के जैसलमेर रोड पर मेडिकल कॉलेज के पास 28 मार्च की रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें डॉक्टर नरेश जांगिड़ गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में उनके साथी डॉक्टर अशोक कुमार और मेडिकल स्टूडेंट रमेश विश्नोई की मौके पर ही मौत हो गई थी। नरेश जांगिड़ को पहले जोधपुर और फिर गंभीर हालत में अहमदाबाद रेफर किया गया, जहां तीन दिनों तक वे जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। आखिरकार, सोमवार की रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मंगलवार सुबह गुड़ामालानी अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर उनके पैतृक गांव होडू पहुंचे, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव में शोक की लहर थी, क्योंकि नरेश सिर्फ एक डॉक्टर ही नहीं बल्कि सभी के प्रिय थे। उनके पिता पोकराराम जांगिड़, जो सांचौर में मेल नर्स के रूप में कार्यरत हैं, बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, जो पूरा तो हुआ लेकिन ज्यादा समय तक खुशियों में नहीं बदल सका।
डॉ. नरेश की तीन साल पहले राधा से शादी हुई थी और सात महीने पहले ही उनके घर बेटे सात्विक का जन्म हुआ था। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। सड़क हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीन लिया बल्कि मासूम सात्विक के सिर से पिता का साया भी उठा दिया। उनकी पत्नी राधा और परिवार के अन्य सदस्य इस गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
पूरे गांव और मेडिकल समुदाय में शोक की लहर है। डॉक्टर नरेश जांगिड़ अपने मरीजों और साथियों के बीच अपनी विनम्रता और सेवा भाव के लिए जाने जाते थे। उनकी असमय मृत्यु ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क हादसों में हम कब तक अपने होनहार युवाओं को खोते रहेंगे?