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सिर्फ पेड़ लगाने से नहीं थमेगी भारतीय शहरों में हीटवेव, जानिए क्यों फेल हो रही है यह रणनीति

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Posted On:Monday, June 22, 2026



भारत के कई शहर इन दिनों भीषण गर्मी और लू (Heatwave) की चपेट में हैं। तापमान बढ़ने पर अक्सर सबसे पहला और आसान समाधान 'अधिक से अधिक पेड़ लगाना' माना जाता है। हालांकि, पर्यावरण और शहरी नियोजन विशेषज्ञों (Urban Planning Experts) का कहना है कि सिर्फ पेड़ लगा देने भर से भारतीय शहरों को हीटवेव की विभीषिका से नहीं बचाया जा सकता। शहरों को सचमुच ठंडा करने के लिए एक अधिक व्यापक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
सिर्फ पेड़ लगाना क्यों काफी नहीं है?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बड़े पैमाने पर पौधे लगा देना हीटवेव का एकमात्र इलाज नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कई व्यावहारिक और ढांचागत चुनौतियां हैं:

  • अंधाधुंध कंक्रीटीकरण (Concrete Jungle): शहरों में कंक्रीट की इमारतें, डामर (Asphalt) की सड़कें और फुटपाथ सूरज की गर्मी को सोख लेते हैं और रात में भी उसे बाहर छोड़ते हैं। इसे 'अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट' (Urban Heat Island Effect) कहा जाता है। जब तक कंक्रीट के इस फैलाव को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक पेड़ भी सीमित स्तर पर ही राहत दे पाते हैं।
  • रखरखाव और पानी की कमी: बिना योजना के लगाए गए पौधे अक्सर पानी की कमी और देखरेख के अभाव में दम तोड़ देते हैं। इसके अलावा, विदेशी या गैर-स्थानीय (non-native) प्रजातियों के पेड़ लगाने से वे स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल नहीं हो पाते और भूजल को तेजी से सोखते हैं।
  • जगह की कमी: घने शहरी इलाकों में बड़े और छायादार पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह (Soil Volume) ही नहीं बची है।
शहरों को ठंडा रखने के लिए अन्य क्या हैं जरूरी उपाय?
रिपोर्ट के अनुसार, हीटवेव से निपटने के लिए शहरों को अपनी पूरी निर्माण नीति में बदलाव करना होगा:
  • कूल रूफ टेक्नोलॉजी (Cool Roofs): इमारतों की छतों पर सफेद या रिफ्लेक्टिव (गर्मी को परावर्तित करने वाले) पेंट और सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए, जो सूरज की किरणों को सोखने के बजाय वापस भेज देती हैं।
  • शहरी जल निकायों (Water Bodies) का संरक्षण: शहरों के पुराने तालाबों, झीलों और सरोवरों को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है। पानी के स्रोत हवा में नमी बनाए रखते हैं और तापमान को प्राकृतिक रूप से कम करते हैं।
  • पारगम्य फुटपाथ (Permeable Pavements): फुटपाथ और सड़कों को ऐसा बनाया जाए जो पानी और हवा को जमीन के अंदर जाने दें, जिससे कंक्रीट का हीटिंग इफेक्ट कम हो सके।
  • स्थानीय प्रजातियों के जंगल (Miyawaki Woods): यदि पेड़ लगाए भी जा रहे हैं, तो वे स्थानीय प्रजातियों (जैसे नीम, पीपल, बरगद) के होने चाहिए जो कम पानी में जीवित रह सकें और ज्यादा छाया दे सकें।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरणविदों का मानना है कि हीटवेव अब केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर आपदा बन चुकी है। सरकार और स्थानीय निकायों को 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर' (पेड़-पौधे) के साथ-साथ 'ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर' (जल निकाय) और स्मार्ट आर्किटेक्चर को मिलाकर एक 'अर्बन कूलिंग एक्शन प्लान' तैयार करना होगा। केवल कागजों पर वृक्षारोपण के आंकड़े बढ़ाने से जमीनी स्तर पर तापमान कम नहीं होने वाला है।


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