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आंध्र प्रदेश का 550 साल पुराना बरगद: एक अकेला पेड़ जो दिखता है पूरे जंगल जैसा

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Posted On:Saturday, August 1, 2026

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित 550 साल पुराना बरगद का पेड़ 'थिम्मम्मा मर्रीमानी' (Thimmamma Marrimanu) प्रकृति का एक अनूठा अजूबा है। लगभग 5 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस विशालकाय पेड़ को देखने पर पहली बार में लगता है कि यह कोई पूरा जंगल है, लेकिन वास्तव में यह एक ही जीवित पेड़ (Single Organism) है।
कैनोपी कवरेज (फैलाव) के मामले में इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records) द्वारा दुनिया का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ स्वीकार किया गया है।
1,000 से अधिक तने, लेकिन पेड़ केवल एक
थिम्मम्मा मर्रीमानी में 1,000 से अधिक तने (Trunks) हैं जो सब एक ही मुख्य पेड़ से जुड़े हैं। पर्यावरणविद जसमीत सिंह अरोड़ा के अनुसार, ज्यादातर पेड़ ऊपर की ओर बढ़ते हैं, लेकिन बरगद का पेड़ क्षैतिज (Sideways) दिशा में फैलता है।

  • हवाई जड़ें (Aerial Roots): पेड़ की ऊंची शाखाओं से निकलने वाली विशेष जड़ें धीरे-धीरे जमीन की ओर बढ़ती हैं।
  • मजबूत स्तंभ: मिट्टी तक पहुंचने पर ये जड़ें जमीन में धंस जाती हैं और धीरे-धीरे मोटे, मजबूत खंभों जैसे तनों का रूप ले लेती हैं।
  • 550 साल का सफर: 5 शताब्दियों से भी अधिक समय से लगातार चल रही इस प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण 1,000 से ज्यादा तने बन चुके हैं, जो इसकी भारी-भरकम शाखाओं को गिरने से बचाते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 'कीस्टोन प्रजाति'
विशाल आकार के अलावा, यह पेड़ स्थानीय पर्यावरण और जीवन-चक्र को बनाए रखने में एक कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species) की भूमिका निभाता है:
  • जीवों का प्राकृतिक आवास: इसके घने कैनोपी और सैकड़ों तनों में पक्षियों, चमगादड़ों और कीट-पतंगों को सुरक्षित घर और घोंसले बनाने की जगह मिलती है।
  • सालों भर भोजन की उपलब्धता: बरगद के पेड़ में पूरे साल फल (अंजीर) लगते हैं। जब अन्य पौधों में फल नहीं होते, तब भी यह वन्यजीवों के लिए भोजन का मुख्य जरिया बनता है।
  • जंगलों का पुनरुत्पादन: इन फलों को खाने वाले पक्षी और चमगादड़ बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे आसपास के जंगलों का स्वाभाविक विकास होता रहता है।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्राकृतिक ढाल
प्राचीन और विशाल बरगद के पेड़ जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं:
  • प्राकृतिक कूलिंग: इसका व्यापक छायादार विस्तार आसपास की जमीन के तापमान को कम रखता है और मिट्टी की नमी बनाए रखता है।
  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge): इसका जड़ों का जाल भारी बारिश में मिट्टी के कटाव को रोकता है और पानी को जमीन के अंदर रिसने में मदद करता है।
  • कार्बन सिंक: लंबे समय तक जीवित रहने और विशाल आकार के कारण यह पेड़ बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर जमा रखता है, जो ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ कारगर साबित होता है।


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