ताजा खबर
ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में अहमदाबाद 571वें स्थान पर, अर्थव्यवस्था में बेहतर लेकिन पर्यावरण-जीवन स्तर म...   ||    हिसार से जम्मू और अहमदाबाद के लिए शुरू होगी सीधी उड़ान, 27 अक्टूबर से सेवा शुरू होने की उम्मीद   ||    भगवंत मान सरकार का बड़ा फैसला: पंजाब के 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए 8% बढ़ा   ||    नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन, गिरफ्तारी के बाद बंगाल की सियासत ...   ||    उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों का साइड इफेक्ट: माउंट मंटाप के नीचे तेजी से बढ़ रहे हैं भूकंप, वैज्...   ||    चंडीगढ़ में अनोखा 'आईफोन लंगर': फ्री में मिलेगा आईफोन, जानें क्या है पूरा प्लान   ||    टाटा सन्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग और टाटा ग्रुप के शेयरों में हलचल   ||    म्यूचुअल फंड्स की पसंद: जिन शेयरों ने दिया जबरदस्त रिटर्न   ||    ‘हनुमान अंश’ के बाद विशाल चतुर्वेदी लाएंगे ‘राम बोला’, तुलसीदास की जीवनगाथा पर होगी अगली फिल्म   ||    ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट का ऐलान, 8 जनवरी 2027 को फिर मचेगा हंसी का धमाल   ||   

3 साल की बच्ची का ‘मृत्यु तक उपवास’; 10 मिनट में त्यागे प्राण, जानें मां-बाप को क्यों लेना पड़ा फैसला?

Photo Source :

Posted On:Monday, May 5, 2025

यह कहानी वास्तव में दिल को छूने वाली है, और यह एक ऐसे दर्दनाक अनुभव को सामने लाती है जिसका कोई भी माता-पिता सामना नहीं करना चाहते। पीयूष और वर्षा के लिए, जिनकी तीन साल की बेटी वियाना गंभीर ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही थी, यह निर्णय पूरी तरह से असाधारण और भावनात्मक रूप से कष्टदायक था। इस स्थिति में, जब डॉक्टरों ने किसी भी तरह का इलाज संभव नहीं बताया और बच्ची की हालत और भी बिगड़ने लगी, तो उन्होंने "संथारा" का रास्ता चुना, जो जैन धर्म का एक परंपरागत व्रत है।

संथारा जैन धर्म के अनुयायियों के बीच एक धार्मिक प्रथा है, जिसमें व्यक्ति जानबूझकर अपने शरीर को छोड़ने के लिए तप करता है। यह प्रथा तब की जाती है जब किसी व्यक्ति की बीमारी या कठिनाई ऐसी हो कि उसे जीवित रहना बहुत कष्टप्रद हो। यह प्रथा मृत्यु की ओर अग्रसर होने के एक शांतिपूर्ण तरीके के रूप में देखी जाती है, लेकिन इसे समाज में विवादास्पद भी माना जाता है, क्योंकि इसे जीवन को समाप्त करने का एक रूप माना जाता है।

वियाना की कहानी में, इस प्रथा को उसकी परिवार ने तब अपनाया जब उन्हें यह लगा कि उनकी बेटी की हालत सुधारने की कोई उम्मीद नहीं बची है और वह उसके दर्द को और बढ़ता हुआ नहीं देख सकते थे।

क्या यह सही था?

यह एक बहुत ही जटिल और संवेदनशील मुद्दा है, और समाज में इसके बारे में अलग-अलग विचार हो सकते हैं। किसी भी माता-पिता के लिए यह कल्पना करना भी अत्यंत कष्टकारी होता है कि उन्हें अपनी संतान के लिए ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े, जहां उन्हें उसे जानबूझकर मौत के करीब ले जाना पड़े। लेकिन इस निर्णय ने यह भी दिखाया कि कभी-कभी परिवार अपने प्रियजनों के दर्द को देखकर विवश हो जाते हैं और वे यह निर्णय लेते हैं, जो उन्हें लगता है कि उनके बच्चे के लिए सबसे कम कष्टकारी होगा।

यह घटना धार्मिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विचार करने के लिए बहुत कुछ देती है। लोग इस पर विभिन्न राय रख सकते हैं, लेकिन अंततः यह माता-पिता का निजी और संवेदनशील निर्णय था, जो उनकी स्थिति के हिसाब से किया गया था।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.