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दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, हमारी सीमाएं अटल, इनसे समझौता न

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Posted On:Tuesday, September 8, 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को लेकर एक अहम प्रस्ताव पारित होने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अधिक क्षेत्रफल-सटीक नक्शों को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को 164-1 के भारी बहुमत से मंजूरी दी। अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि छह देश मतदान से दूर रहे।

जम्मू-कश्मीर पर क्या असर?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस प्रस्ताव से जम्मू-कश्मीर के विवाद पर कोई कानूनी असर पड़ेगा। जवाब है—सीधे तौर पर नहीं। प्रस्ताव का मुख्य फोकस कार्टोग्राफिक यानी नक्शे पर भौगोलिक आकार के प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, क्षेत्रीय दावों या विवादित क्षेत्रों पर कोई नया कानूनी फैसला नहीं करता।

भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारत ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि उसका समर्थन किसी एक खास मैप प्रोजेक्शन को अपनाने की स्वीकृति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत ने equal-area projections के व्यापक इस्तेमाल और विचार का समर्थन किया है।

भारत ने जम्मू-कश्मीर पर क्या कहा?

भारत ने साफ किया है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में उसकी स्थिति पहले जैसी ही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत का क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुरूप ही दिखाया जाना चाहिए

इसलिए Equal Earth projection आने से जम्मू-कश्मीर की कानूनी या संवैधानिक स्थिति अपने आप नहीं बदलती। नक्शे में किसी क्षेत्र का आकार या प्रोजेक्शन बदलना और किसी क्षेत्र पर संप्रभुता का निर्धारण करना दो अलग-अलग बातें हैं।

फिर विवाद क्यों बढ़ा?

विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि नक्शे राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील विषय भी होते हैं। जम्मू-कश्मीर को अलग-अलग देशों और संस्थानों के नक्शों में किस तरह दिखाया जाता है, इसे भारत और पाकिस्तान लंबे समय से बेहद संवेदनशील मुद्दे के तौर पर देखते हैं।

ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का नया प्रस्ताव भले ही तकनीकी और गैर-बाध्यकारी हो, लेकिन उसके बाद नक्शों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर राजनीतिक बहस तेज होना स्वाभाविक है। फिलहाल इस प्रस्ताव का वास्तविक असर शिक्षा, मीडिया और डिजिटल मैपिंग में equal-area projections के बढ़ते इस्तेमाल तक सीमित रहने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर की सीमाओं या भारत के क्षेत्रीय दावे पर इससे कोई सीधा कानूनी बदलाव नहीं होता।


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