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विकसित भारत 2047, घरेलू बॉन्ड बाजार में बुनियादी सुधारों के बिना अधूरा रह जाएगा 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना, क्रिसिल की चेतावनी

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Posted On:Saturday, July 18, 2026

मुंबई: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने देश के वित्तीय बुनियादी ढांचे को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विश्लेषण पेश किया है। मुंबई में मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की गरिमामयी उपस्थिति में 'इंडियन डेट मार्केट इयरबुक 2026' का विमोचन किया गया, जिसका मुख्य विषय "बॉन्डिंग फॉर विकसित भारत 2047" रखा गया है। इस वार्षिक रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि भारत को साल 2047 तक 30 ट्रिलियन (30 लाख करोड़) डॉलर की विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करना है, तो उसे अपने घरेलू ऋण-पूंजी (बॉन्ड) बाजार में आमूल-चूल और बुनियादी बदलाव करने होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केवल बैंकिंग क्षेत्र के भरोसे इतनी बड़ी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना असंभव होगा।

क्रिसिल के शीर्ष नेतृत्व—अमिश मेहता और सुबोध राय—द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश का ऋण-जमा अनुपात (क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो) ऐतिहासिक रूप से 82 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि बैंकों में जमा वृद्धि की रफ्तार लगातार धीमी हो रही है। वर्तमान में भारत का गैर-सरकारी (गैर-संप्रभु) ऋण देश की जीडीपी का महज 84 प्रतिशत है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर 150 प्रतिशत तक ले जाना होगा। ऐतिहासिक रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने भी अपने विकास के चरम दौर में इसी प्रकार की ऋण संरचना का सहारा लिया था।

क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक मिरेन लोढ़ा और मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने नीतिगत सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की विशाल बुनियादी ढांचागत (इन्फ्रास्ट्रक्चर) जरूरतों के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड, म्यूनिसिपल बॉन्ड और प्रतिभूतिकृत साधनों (सेक्युरिटाइज्ड इंस्ट्रूमेंट्स) को मुख्यधारा में लाना होगा। इसके लिए निवेशकों के आधार को व्यापक बनाने के साथ-साथ सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग को तेज करना बेहद जरूरी है, ताकि आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी देश को किफायती दरों पर दीर्घकालिक पूंजी मिलती रहे।


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