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भारतीय यूज्ड लग्जरी कार बाजार में उछाल: पारदर्शिता और सर्टिफिकेशन ने बदला ग्राहकों का नजरिया

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Posted On:Wednesday, September 9, 2026

भारत में प्री-ओन्ड यानी सेकंड हैंड लग्जरी कारों का बाजार अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक संगठित और भरोसेमंद उद्योग का रूप ले चुका है। हालिया उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, देश में प्रयुक्त लग्जरी गाड़ियों की मांग में सालाना 20 से 25 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की जा रही है। जो ग्राहक पहले 20 से 30 लाख रुपये के बजट में नई मिड-साइज़ या कॉम्पैक्ट SUV खरीदते थे, वे अब उसी बजट में मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसे प्रीमियम ब्रांड्स की कम चली हुई गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस सेगमेंट में आए इस बड़े बदलाव पर प्रकाश डालते हुए 'ऑटोबेस्ट एम्पेरियो' (Autobest Emperio) के संस्थापक अवनीत सिंह कोहली ने बताया कि 2015 के बाद से इस बाजार का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले जहां ग्राहक बिचौलियों और स्थानीय डीलरों के कारण गाड़ियों की स्थिति व कागजी कार्रवाई को लेकर आशंकित रहते थे, वहीं अब 100 से अधिक क्वालिटी चेक्स, विस्तृत सर्विस हिस्ट्री और सर्टिफाइड वारंटी ने इस भरोसे को मजबूत किया है। 2012 में सालाना लगभग 100 कारें बेचने वाले संगठित डीलर आज प्रति माह 40 से 50 यूनिट्स की बिक्री कर रहे हैं।

गाड़ियों की सोर्सिंग और प्राइजिंग पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि ये कारें मुख्य रूप से कॉर्पोरेट लीज रिटर्न, एनआरआई माइग्रेशन और नए मॉडल्स या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में अपग्रेड करने वाले व्यक्तिगत मालिकों से आती हैं। वाहन की वास्तविक स्थिति, कुल किलोमीटर और पारदर्शी दस्तावेज ही इसकी सही कीमत तय करते हैं, जिससे ग्राहकों को बिना किसी जोखिम के प्रीमियम ड्राइविंग अनुभव मिलता है।


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