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भारतीय कपड़ा उद्योग में बड़े बदलाव की तैयारी: 2030 तक $100 अरब के निर्यात लक्ष्य के लिए सूती की जगह 'मानव निर्मित फाइबर' पर विशेष जोर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया रोडमैप का अनावरण

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Posted On:Wednesday, June 24, 2026

नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में भारतीय परिधानों की हिस्सेदारी बढ़ाने और साल 2030 तक वस्त्र निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने एक कड़े रणनीतिक बदलाव का बिगुल फूंक दिया है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित "वैश्विक बाजारों के लिए वस्त्र" विषयक दो-दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस बात पर कड़ा विलेख बल दिया कि भारत को अब पारंपरिक कपास-प्रधान (कॉटन) उत्पादन के दायरे से बाहर निकलकर तेजी से बदलते वैश्विक फैशन ट्रेंड्स के अनुरूप मानव-निर्मित फाइबर (MMF) यानी कृत्रिम धागे और सिंथेटिक कपड़ों के उत्पादन की ओर रुख करना होगा। इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का आधिकारिक उद्घाटन केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने किया, जिसमें कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने भी कूटनीतिक रूप से सत्र को संबोधित किया।

वर्तमान में भारत का वार्षिक वस्त्र एवं परिधान निर्यात लगभग 37 अरब डॉलर के स्तर पर अटका हुआ है, जिसे तीन गुना करने के लिए कैबिनेट सचिवालय की पहल पर केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत कूटनीतिक सहयोग का खाका खींचा गया है। इस शिखर सम्मेलन के दौरान 36 राज्यों की निर्यात योजनाओं (SEAP) और देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित 200 जिला-स्तरीय बैठकों के निष्कर्षों को साझा किया गया। कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि 100 अरब डॉलर के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला-आधारित निर्यात क्लस्टर्स का विकास, तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) को बढ़ावा देना, स्थिरता और वैश्विक ब्रांड निर्माण विधिक रूप से अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर 'मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाना' और 'निर्यात कैसे करें' जैसी दो मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया।

सम्मेलन के दौरान लुधियाना, तिरुप्पुर, सूरत और भदोही जैसे देश के प्रमुख वस्त्र हब की ढांचागत लॉजिस्टिक्स और श्रम अनुपालन संबंधी चुनौतियों पर गहन नीतिगत विचार-विमर्श हुआ। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणित विरासत उत्पादों और पश्मीना जैसे प्रीमियम सेगमेंट को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स, वित्तीय ऋण और पीएम-मित्र पार्क (PM-MITRA) जैसी अवसंरचनात्मक बुनियादी सुविधाओं को कड़ा विलेख बल देने की सिफारिश की गई। इन तीन विस्तृत सत्रों के मंथन के आधार पर जल्द ही 'राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात रोडमैप 2030' को विधिक रूप से लागू किया जाएगा, जो देश के आर्थिक विकास में एक नया कूटनीतिक मील का पत्थर साबित होगा।


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