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विदेशी मुद्रा बाजार में उथल-पुथल: डॉलर की चौतरफा मांग से भारतीय रुपया 19 पैसे और टूटा, कच्चे तेल की नरमी से गिरावट पर लगा कड़ा अंकुश

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Posted On:Friday, July 3, 2026

मुंबई: अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार (Forex Market) में अमेरिकी डॉलर की कड़क और निरंतर मांग के चलते भारतीय रुपये में गिरावट का विखंडनकारी सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार को कारोबार की समाप्ति पर भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की विधिक कमजोरी के साथ 95.35 रुपये प्रति डॉलर के कड़े स्तर पर बंद हुई। यह गत 11 जून के बाद से रुपये का सबसे निचला और कड़ा विलेख स्तर है। इससे पूर्व पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया 60 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.16 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिससे बाजार के लॉजिस्टिक्स में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

हालांकि, वैश्विक बाजार के कूटनीतिक संकेतों के कारण आज सुबह रुपये की शुरुआत काफी विखंडनकारी और मजबूत रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और डॉलर सूचकांक (Dollar Index) के कमजोर होने से मिले कड़े समर्थन के दम पर रुपया आज सुबह 40 पैसे की कड़क मजबूती के साथ 94.50 रुपये प्रति डॉलर पर खुला था और शुरुआती कारोबार में 94.90 रुपये के स्तर तक पहुंचा। लेकिन इसके तुरंत बाद सस्ते डॉलर की विलेख खरीद और आयातकों की भारी मांग के चलते रुपये पर कड़ा दबाव बन गया, जिसके कारण एक समय यह 95.42 रुपये के स्तर तक लुढ़क गया था।

वैश्विक कमोडिटी लॉजिस्टिक्स की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा आज एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 71 डॉलर प्रति बैरल के कड़े स्तर से नीचे आ गया। इसके साथ ही, दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक भी 0.5 प्रतिशत तक कड़ाई से टूट गया। कच्चे तेल और डॉलर सूचकांक में आई इस विलेख गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम किया, जिससे घरेलू मुद्रा की और अधिक विखंडनकारी गिरावट को रोकने में विधिक मदद मिली। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में रुपये की स्थिति पूरी तरह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के कूटनीतिक रुख पर निर्भर करेगी।


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