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कृषि-रसायन क्षेत्र में डेटा संरक्षण की मांग: घरेलू कंपनियों ने कहा—प्रोपराइटी डेटा प्रोटेक्शन से किसानों को मिलेंगे आधुनिक और सुरक्षित समाधान

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Posted On:Thursday, August 20, 2026

नई दिल्ली: भारत की प्रमुख कृषि-रसायन निर्माता कंपनियों—क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट—ने एक संयुक्त बयान जारी कर सरकार से 'नियामकीय डेटा संरक्षण' (Regulatory Data Protection - RDP) लागू करने की पुरजोर मांग की है। कंपनियों का कहना है कि नए और सुरक्षित रसायनों के पंजीकरण के दौरान नियामकों के पास जमा कराए गए शोध डेटा को एक निश्चित समय सीमा तक तीसरे पक्ष के साथ साझा न करने की व्यवस्था से देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी। वर्तमान में भारत में कृषि-रसायनों के लिए डेटा संरक्षण की अवधि तय नहीं है, जबकि चीन में 6 वर्ष, अमेरिका में 10 वर्ष और यूरोपीय संघ में जैविक व पर्यावरण-अनुकूल रसायनों के लिए 13 वर्ष तक का संरक्षण दिया जाता है।

उद्योगजगत के विशेषज्ञों का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों, खरपतवारों और बीमारियों में आ रहे नए प्रतिरोधी लक्षणों से निपटने के लिए भारतीय किसानों को कम मात्रा में उपयोग होने वाले और अधिक लक्षित प्रभाव वाले 'न्यू-जनरेशन मॉलिक्यूल्स' की तत्काल आवश्यकता है। क्रापलाइफ इंडिया और यस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल कीटों और बीमारियों के कारण करीब 2 लाख करोड़ रुपये की फसल का नुकसान होता है। रैलिस इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला और धानुका एग्रीटेक के राहुल धानुका के मुताबिक, डेटा संरक्षण नीति से वास्तविक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बहुराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियां नई तकनीकों को भारतीय बाजारों में पेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए 'कीटनाशक प्रबंधन विधेयक' के मसौदे के बीच यह मांग भारतीय कृषि-रसायन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।


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