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8वां वेतन आयोग, फिटमेंट फैक्टर के उछाल से बदलेगा एचआरए का पूरा गणित, जानिए शहरवार मिलने वाले लाभ

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Posted On:Wednesday, July 15, 2026

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसके लागू होने की संभावनाओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। किसी भी नए वेतन आयोग में कर्मचारियों की कुल सैलरी का निर्धारण मुख्य रूप से 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) के जरिए होता है। फिटमेंट फैक्टर में बदलाव होते ही कर्मचारियों की मूल सैलरी (Basic Pay) में सीधा इजाफा होता है, जिसका सीधा और बड़ा असर उनके हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए (HRA) पर देखने को मिलता है। चूंकि एचआरए का सीधा संबंध मूल वेतन के प्रतिशत से है, इसलिए फिटमेंट फैक्टर का पैमाना 2, 2.5 या 3 गुना तय होने के आधार पर कर्मचारियों को मिलने वाले मकान किराए भत्ते में भी भारी उछाल आएगा।

वर्तमान में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत देश के शहरों को उनकी जनसंख्या और विकास के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों—X, Y और Z में विभाजित किया गया है। मेट्रो और बेहद बड़े शहरों को 'X कैटेगरी' में रखा गया है, जहाँ कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का अधिकतम 30 प्रतिशत एचआरए के रूप में मिलता है। इसके बाद, मध्यम श्रेणी के शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को 'Y कैटेगरी' में शामिल किया गया है, जहाँ 20 प्रतिशत भत्ता निर्धारित है। वहीं, ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों वाले 'Z कैटेगरी' के तहत बेसिक पे का 10 प्रतिशत एचआरए दिया जाता है।

आगामी वेतन आयोग में यदि सरकार फिटमेंट फैक्टर को संशोधित कर बढ़ाती है, तो न्यूनतम मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी में डेढ़ से दो गुना की वृद्धि होती है, तो उसके आधार पर मिलने वाला 30%, 20% या 10% का एचआरए भी आनुपातिक रूप से बढ़ जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से महंगे मेट्रो शहरों में रहने वाले केंद्रीय कर्मियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा, क्योंकि वहां मकान किराया भत्ते का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर उनकी जेब पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगा।


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