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US-Saudi Joint Airstrikes: इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई

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Posted On:Wednesday, July 29, 2026

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में मिलिशिया के हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई, जिनके पीछे अमेरिका ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का समर्थन होने का आरोप लगाया है।

CENTCOM ने दी कड़ी चेतावनी

CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की कई कोशिशें नाकाम कर दी गईं। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त रूप से जवाबी कार्रवाई करते हुए कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि IRGC और उससे जुड़े समूह ड्रोन हमले जारी रखते हैं, तो आगे भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर फिर ड्रोन हमला

सऊदी अरब ने दावा किया कि लगातार दूसरे दिन इराक की दिशा से आए ड्रोन उसके पूर्वी क्षेत्र में स्थित तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वायु रक्षा प्रणाली ने उन्हें मार गिराया। इन घटनाओं के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सुरक्षा एजेंसियों को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

मिलिशिया ने आरोपों से किया इनकार

ईरान समर्थित कुछ इराकी मिलिशिया समूहों ने इन हमलों में अपनी भूमिका से इनकार किया है। क्षेत्रीय स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि सभी ड्रोन हमलों के लिए कौन जिम्मेदार था। कुछ रिपोर्टों में यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने का दावा किया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा

अमेरिका और सऊदी अरब की इस संयुक्त कार्रवाई ने मिडिल ईस्ट में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रोन हमले और जवाबी सैन्य अभियान जारी रहे, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।


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