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पीओके में विस्फोटक हालात, अब तक 30 की मौत, 200 घायल; कल मुजफ्फराबाद में महासंग्राम

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Posted On:Wednesday, June 10, 2026

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सुलग रही असंतोष की आग अब एक पूर्ण जन-विद्रोह और महासंग्राम का रूप ले चुकी है। महंगाई, आटे-बिजली पर सब्सिडी और नागरिक अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रहे नागरिक संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में बदल गया है।

रावलाकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई सीधी और भीषण झड़पों में आधिकारिक तौर पर 4 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि जमीनी और खुफिया सूत्रों के हवाले से यह आंकड़ा 20 से अधिक बताया जा रहा है। इस हिंसा में 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

इस बीच, जेएएसी (JAAC) द्वारा घोषित ऐतिहासिक 'लॉन्ग मार्च' 11 जून, 2026 को मुजफ्फराबाद में विधायी विधानसभा के बाहर अनिश्चितकालीन धरने के लिए आगे बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना और दंगा पुलिस ने पूरे PoK में अभूतपूर्व आतंक का माहौल बना दिया है।

1. 12 'शरणार्थी सीटों' का विवाद और चुनाव का अल्टीमेटम

क्षेत्र में जारी इस ताजा उबाल के पीछे केवल आर्थिक बदहाली ही नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक कारण भी है। दरअसल, जुलाई 2026 में होने वाले क्षेत्रीय चुनावों से पहले प्रशासन ने विधानसभा की 45 सीटों में से 12 सीटें उन कश्मीरियों (शरणार्थियों) के लिए आरक्षित रखी हैं जो पाकिस्तान के मुख्य प्रांतों (पंजाब, सिंध आदि) में रहते हैं।

जेएएसी (JAAC) के शीर्ष नेता शौकत नवाज मीर का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का इस्तेमाल करके अपने पसंदीदा राजनीतिक दलों के जरिए PoK के स्थानीय जनादेश को चुराता है और यहां के मूल निवासियों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलता है। संगठन ने मांग की थी कि चुनावों से पहले इन विवादास्पद सीटों को खत्म किया जाए, लेकिन मांग पूरी न होने पर उन्होंने 9 जून से भीम्बर और मीरपुर से मुजफ्फराबाद के लिए इस बड़े मार्च की शुरुआत की।

2. इंटरनेट ब्लैकआउट और महिलाओं-बच्चों पर क्रूरता का आरोप

आंदोलन को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे क्षेत्र में पूर्ण संचार और इंटरनेट ब्लैकआउट (Communication Blackout) लागू कर दिया है। भीमबर, कोटली और मुजफ्फराबाद में धारा-144 लागू है और यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है।

'इंडिया टुडे' के हाथ लगे एक खुफिया डॉसियर (Dossier) के अनुसार, पाकिस्तानी रेंजरों और सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों और शोकसभाओं पर सीधे लाइव एम्युनिशन (असली गोलियों) का इस्तेमाल किया है। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि रावलाकोट के कम्बाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के पास हुई हिंसक कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी बेरहमी से निशाना बनाया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

3. भारत का कड़ा रुख— "पाकिस्तान को कुकर्मों के लिए जवाबदेह ठहराए दुनिया"

पीओके में मानवाधिकारों के इस वीभत्स हनन और खून-खराबे पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और कूटनीतिक रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा:

"हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बुनियादी वस्तुओं की कीमतों और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई और भारी जान-माल के नुकसान से बेहद चिंतित हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और क्रूरता के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह जवाबदेह ठहराएगा।"

इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के उस सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा को भी बेनकाब किया, जिसमें वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस स्वदेशी नागरिक आंदोलन के पीछे 'विदेशी ताकतों' का हाथ होने की फेक न्यूज फैला रहा है।

11 जून को मुजफ्फराबाद में महासंग्राम की आशंका

आज पूरे PoK में 'शटरडाउन' और 'पहियाजाम' हड़ताल के कारण सड़कें पूरी तरह सुनसान हैं और बाजार बंद हैं। कानूनी बिरादरी (बार काउंसिल) ने भी वरिष्ठ वकील अमजद अली खान की गिरफ्तारी के विरोध में अदालतों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। 11 जून को जब हजारों प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम मुजफ्फराबाद असेंबली को घेरने पहुंचेगा, तो क्षेत्र में एक बड़े और विनाशकारी सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है।


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