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इजरायल की बढ़ती बेचैनी - क्या ईरान के साथ 'अधूरा समझौता' करेंगे ट्रंप? नेतन्याहू खेमे में गहराया तनाव

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Posted On:Thursday, May 14, 2026

वाशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक हलचलों ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को चरम पर पहुँचा दिया है। 13 मई 2026 को सामने आई विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का प्रशासन इस बात से आशंकित है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'व्यापारिक कूटनीति' के तहत ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता कर सकते हैं, जो इजरायल के अस्तित्वगत खतरों का समाधान करने में विफल रहे। इजरायली सूत्रों का मानना है कि यदि ट्रंप बातचीत की थकान के कारण ईरान को क्षेत्रीय रियायतें देते हैं, तो यह मध्य पूर्व में "अधूरे युद्ध" की नींव रखेगा।

रणनीतिक मतभेद और 'आंशिक समझौता'

इजरायल की मुख्य चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ उसके बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिज़्बुल्ला) को लेकर है।

  • अधूरे लक्ष्य: इजरायली अधिकारियों का तर्क है कि यदि नया समझौता केवल यूरेनियम संवर्धन तक सीमित रहता है और ईरान के मिसाइल नेटवर्क को अछूता छोड़ देता है, तो यह ईरान को फिर से संगठित होने का अवसर देगा।

  • आर्थिक दबाव: इजरायल का मानना है कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' के तहत ईरान को होने वाला 50 करोड़ डॉलर प्रतिदिन का नुकसान तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कि उसकी सैन्य कमर पूरी तरह टूट न जाए।

व्हाइट हाउस का रुख और घरेलू मजबूरियाँ

दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन पर अमेरिका में बढ़ती ईंधन की कीमतों और युद्ध विरोधी जनमत का भारी दबाव है।

  1. ट्रंप की प्राथमिकता: व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप बातचीत में "मजबूत स्थिति" में हैं, लेकिन वे एक ऐसा लंबा युद्ध नहीं चाहते जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दे।

  2. नेतन्याहू की जिद: नेतन्याहू के लिए यह युद्ध तब तक समाप्त नहीं माना जाएगा जब तक ईरान की 'प्रॉक्सिस' को जड़ से खत्म न कर दिया जाए।

ईरान ने पहले ही पांच कड़ी शर्तें रखी हैं, जिन्हें ट्रंप ने 'अस्वीकार्य' बताया है। हालांकि, इजरायल को डर है कि अंतिम समय में ट्रंप अपने 'आर्ट ऑफ द डील' के तहत कोई ऐसा समझौता कर सकते हैं जो इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा के साथ समझौता हो।


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