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होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका-ईरान के बीच बड़ा समझौता: 60 दिनों तक रहेगा टोल-फ्री मार्ग, फारस की खाड़ी से जहाजों को निकालने की कवायद शुरू

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Posted On:Thursday, June 18, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-बिंदुओं वाले ऐतिहासिक समझौते (Islamabad MoU) में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर कई बेहद महत्वपूर्ण और कूटनीतिक शर्तें तय की गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा मीडिया के सामने पढ़े गए ड्राफ्ट के अनुसार, होर्मुज को लेकर निम्नलिखित प्रमुख बातें कही गई हैं:

  • 60 दिनों के लिए टोल-फ्री और सुरक्षित मार्ग: समझौते के तहत ईरान इस बात पर सहमत हुआ है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक और कमर्शियल जहाजों को बिना किसी शुल्क (Toll-Free) के सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति देगा। हालांकि, यह व्यवस्था शुरुआती 60 दिनों के लिए अंतरिम रूप से लागू की गई है।

  • नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाना: अमेरिका इस बात पर राजी हुआ है कि वह ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज स्ट्रेट के पास लगाई गई अपनी सैन्य व नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) को तुरंत प्रभाव से हटा लेगा।

  • समुद्री सुरंगों (Mines) को साफ करना: इस स्ट्रेट में युद्ध के दौरान बिछाई गई समुद्री सुरंगों (माइंस) को हटाने के लिए ठोस योजना बनाई गई है ताकि शिपिंग कंपनियों के लिए मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हो सके।

  • शिपिंग कंपनियों का भरोसा बहाल करना: दोनों देशों की नाकेबंदी और हमलों के कारण जिन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपने जहाज भेजने बंद कर दिए थे, उन्हें सुरक्षा की गारंटी देकर व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्तर पर वापस लाना इस समझौते का प्राथमिक लक्ष्य है।

ईरान का रुख और भविष्य का टकराव

भले ही समझौते के ड्राफ्ट में 60 दिनों के लिए टोल-फ्री मार्ग की बात कही गई है, लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार और वहां के शीर्ष नेतृत्व ने सरकारी टेलीविजन पर स्पष्ट किया है कि 60 दिनों की इस तय अवधि के समाप्त होने के बाद ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क (फीस) वसूलेगा। ईरान का दावा है कि होर्मुज पर उसकी संप्रभुता है और वह युद्ध से पहले वाली स्थितियों में पूरी तरह वापस नहीं लौटेगा।

इसके विपरीत, अमेरिका की कोशिश 'वीआईपी पास' और सैन्य सुरक्षा एस्कॉर्ट जैसे विकल्पों के जरिए यह सुनिश्चित करने की है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर एकतरफा टैक्स न वसूल सके और वैश्विक तेल आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे।


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