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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर वाशिंगटन में मंथन, जल्द मिल सकती है खुशखबरी

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Posted On:Tuesday, April 21, 2026

भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने के लिए वॉशिंगटन में महत्वपूर्ण बैठकें चल रही हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के साथ 'फिनिशिंग टच' वाली चर्चा कर रहा है।

वार्ता का मुख्य उद्देश्य: टैरिफ में भारी कटौती

इस बातचीत का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु दोनों देशों के बीच टैरिफ (सीमा शुल्क) को कम करना और बाजारों तक एक-दूसरे के सामान की पहुंच को आसान बनाना है।
  • 18% का लक्ष्य: फरवरी 2026 में हुए शुरुआती समझौतों के अनुसार, अमेरिका ने भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी।
  • रूसी तेल का मामला: अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को भी पहले ही हटा दिया है।

'मिशन 500': 2030 तक का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस व्यापार समझौते की नींव 13 फरवरी 2025 को अपनी मुलाकात के दौरान रखी थी। इस समझौते का दीर्घकालिक लक्ष्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है, जिसे 'मिशन 500' का नाम दिया गया है।
"ज्यादातर तकनीकी काम पूरा हो चुका है। अब केवल कुछ छोटी विसंगतियों और डिजिटल व्यापार नियमों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।" — वाणिज्य मंत्रालय के सूत्र

किन क्षेत्रों को होगा फायदा?

  1. कृषि: अमेरिका से सूखे फल, बादाम, अखरोट, सोयाबीन तेल और वाइन के भारत में आयात पर ड्यूटी कम हो सकती है।
  2. आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स: संचार प्रौद्योगिकी के सामानों के लिए भारतीय बाजारों में पहुंच आसान होगी।
  3. ऊर्जा: भारत ने अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर मूल्य की ऊर्जा, कोयला और आईसीटी उत्पाद खरीदने का इरादा जताया है।
  4. रक्षा: 'कंपैक्ट 21' (COMPACT 21) पहल के तहत दोनों देश रक्षा तकनीक और विनिर्माण में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
यह डील केवल व्यापार बल्कि चीन जैसे देशों की गैर-बाजार नीतियों (Non-market policies) के खिलाफ एक मजबूत आर्थिक गठबंधन के रूप में भी देखी जा रही है। उम्मीद है कि इस सप्ताह की बातचीत के बाद किसी बड़े आधिकारिक समझौते का ऐलान हो सकता है।


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