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साइबर सुरक्षा में एआई की विफलता, हमले में माहिर, लेकिन बचाव में फिसड्डी

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Posted On:Friday, May 1, 2026

मुंबई, 30 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन) तकनीक की दुनिया में एंथ्रोपिक (Anthropic) के 'मिथोस' जैसे एआई मॉडल्स अपनी ताकत का लोहा मनवा रहे हैं, लेकिन एक नई रिसर्च ने इनकी सुरक्षा क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'Simbian.ai' द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, आज के सबसे उन्नत एआई मॉडल साइबर हमलों को अंजाम देने में तो इंसानों से बेहतर साबित हो रहे हैं, लेकिन जब बात बचाव (Defense) की आती है, तो वे बुरी तरह विफल हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु:

  • परीक्षण में फेल हुए टॉप मॉडल्स: रिसर्च में दुनिया के 11 बेहतरीन एआई मॉडल्स का परीक्षण किया गया। इनमें से कोई भी मॉडल साइबर सुरक्षा के मानकों पर खरा नहीं उतरा।
  • हमला बनाम बचाव: सिम्बियन एआई के सीईओ अंबुज कुमार (IIT कानपुर और स्टैनफोर्ड के पूर्व छात्र) ने बताया कि हमले के मामले में ये एआई मॉडल अधिकांश इंसानों से बेहतर थे, लेकिन सुरक्षा यानी 'डिफेंस' में इनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
  • डाटा का अंबार और एआई की उलझन: परीक्षण के दौरान एआई को हजारों कंप्यूटर लॉग्स में से हैकर्स को खोजने का काम दिया गया (जैसे भूसे के ढेर में सुई ढूंढना)। क्लॉड ओपस 4.6 (Claude Opus 4.6) जैसे सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले मॉडल भी केवल 4-5% वास्तविक खतरों को ही पहचान पाए।
बचाव करना इतना कठिन क्यों है?
अध्ययन में तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं:
  1. विशाल डाटा: सुरक्षा लॉग्स में लाखों प्रविष्टियां होती हैं, जिनमें से संदिग्ध गतिविधियों को चुनना एआई के लिए बहुत जटिल होता है।
  2. पहचान के बावजूद रिपोर्ट न करना: कई बार एआई संदिग्ध गतिविधियों को देख तो लेता है, लेकिन उन्हें खतरे के रूप में फ्लैग (Flag) नहीं कर पाता।
  3. अदृश्य हमले: कुछ हैकिंग तकनीकें इतने सूक्ष्म निशान छोड़ती हैं कि एआई उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान एआई एल्गोरिदम की अपनी सीमाएं हैं। वे पैटर्न पहचानने में तो अच्छे हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा की पेचीदगियों को पूरी तरह समझने के लिए अभी उन्हें और विकसित होने की जरूरत है।


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