अहमदाबाद न्यूज डेस्क: भारत सरकार देश की परिवहन प्रणाली को एक अभूतपूर्व गति देने के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का दायरा तेजी से बढ़ा रही है। मुंबई-अहमदाबाद के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन के निर्माण से मिले अनुभवों और तकनीकी सीखों का उपयोग करते हुए, अब दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम तेज कर दिया गया है। करीब 1705 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार होने के बाद देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट बन जाएगा। रेल मंत्रालय का लक्ष्य अगले दो वर्षों के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर जमीनी काम शुरू करने का है, जिसमें सबसे पहली प्राथमिकता दिल्ली-वाराणसी खंड को दी गई है।
इस विशाल प्रोजेक्ट के पहले चरण में 865 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी रूट को विकसित किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये है। इस आधुनिक रूट पर सफर को सुगम बनाने के लिए एलिवेटेड ट्रैक्स और नदियों पर पुलों के साथ-साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के पास एक 9.4 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक भूमिगत (Underground) सुरंग भी बनाई जाएगी। दिल्ली (हजरत निजामुद्दीन) से शुरू होकर यह ट्रेन नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, लखनऊ और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से गुजरते हुए वाराणसी पहुंचेगी। इस रूट की एक और बड़ी खासियत यह है कि मुख्य ट्रैक से लखनऊ और रामनगरी अयोध्या को जोड़ने के लिए एक अलग से 135 किलोमीटर लंबा लिंक रूट भी तैयार किया जाएगा।
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने से उत्तर भारत में यात्रा के समय में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों के जरिए दिल्ली से बनारस की दूरी तय करने में जहां 11 से 12 घंटे का समय लगता है, वहीं बुलेट ट्रेन के जरिए यह सफर महज 3 घंटे 50 मिनट में सिमट जाएगा। इसी तरह, दिल्ली से लखनऊ की दूरी सिर्फ 2 घंटे 10 मिनट और जेवर एयरपोर्ट से लखनऊ का सफर केवल 1 घंटा 40 मिनट का रह जाएगा। आगे चलकर इस पूरे कॉरिडोर को वाराणसी से आगे बढ़ाते हुए बिहार के पटना के रास्ते पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जोड़ा जाएगा, जिससे उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी देश की राजधानी से सीधे और बेहद तेज हो जाएगी।
दिल्ली को एक केंद्रीय हाई-स्पीड रेल हब बनाने के लिए रेल मंत्रालय इसके अलावा कई अन्य रूटों पर भी समानांतर रूप से काम कर रहा है। वर्तमान में देश में कुल 10 प्रमुख बुलेट ट्रेन कॉरिडोर्स पर सर्वे और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। इनमें दिल्ली-अहमदाबाद कॉरिडोर (886 किमी) और दिल्ली-अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर शामिल हैं, जो आने वाले समय में देश के बड़े व्यापारिक और पर्यटन केंद्रों को आपस में जोड़ेंगे। सरकार की इस सुदृढ़ बुनियादी ढांचा योजना से न केवल आम जनता का सफर घंटों से मिनटों में बदलेगा, बल्कि देश के आर्थिक विकास और व्यापारिक लॉजिस्टिक्स को भी एक अभूतपूर्व रफ़्तार मिलेगी।