अहमदाबाद न्यूज डेस्क: जैन समाज की प्रतिष्ठित और परम पूज्य दिगम्बर साध्वी अंतिम मति माताजी का हाल ही में समाधिपूर्वक देहावसान हो गया। उन्होंने पूरी चेतना के साथ अपने नश्वर शरीर का त्याग कर सिद्ध शिला की ओर प्रस्थान किया, जिसके बाद उनकी देह पंचतत्व में विलीन हो गई। 48 वर्षीय अंतिम मति माताजी का सांसारिक (दीक्षा से पूर्व का) नाम अनुराधा जैन था और वह चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रमेश जी जैन की सुपुत्री थीं।
अनुराधा जैन पिछले लंबे समय से गंभीर अस्वस्थता के चलते अहमदाबाद के एक अस्पताल में उपचाराधीन थीं। जब चिकित्सकों ने उनकी बीमारी के आगे अपने हाथ खड़े कर दिए और इलाज बेअसर साबित होने लगा, तब उन्होंने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्म-कल्याण की राह पर चलने की दृढ़ इच्छा व्यक्त की। उनकी इस पवित्र भावना का आदर करते हुए, बाहुबली कॉलोनी (बांसवाड़ा) में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य सम्मेद शिखर मति माताजी ने उन्हें दिगम्बर दीक्षा प्रदान की, जिसके बाद उन्हें 'अंतिम मति माताजी' के नए नाम से संबोधित किया गया।
शारीरिक स्वास्थ्य में लगातार आ रही भारी गिरावट के बावजूद, अंतिम मति माताजी ने अपने अंतिम क्षणों में पूरी जागृति, होश-हवास और आत्म-लीनता का परिचय दिया। उन्होंने शरीर त्यागने से पूर्व अपने सभी परिजनों व समाज जन से मिच्छामी दुक्कड़म कहते हुए क्षमा याचना की। उनके अंतिम समय में उन्हें राष्ट्रसंत पुलक सागर महाराज, सुंदर सागर महाराज, ज्ञान मति माताजी और भरतेश्वरी माताजी जैसे महान जैन संतों व साध्वियों का मंगल आशीर्वाद एवं आत्मिक संबल प्राप्त हुआ।
माताजी के इस पवित्र समाधि मरण के पश्चात महावीर नगर स्थित संत भवन में एक विशाल विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस शोक व श्रद्धा सभा में महावीर दिगम्बर जैन मंदिर के अध्यक्ष बालू भाई वोरा, सुदर्शन वोरा, बसंत नागदा, नवीन वोरा, वीर प्रकाश वोरा, पूरणमल दावड़ा, हेमेंद्र मेहता, गजेंद्र विदावत, शैलेश कोठारी और आनंद गांगावत सहित जैन समाज के अनगिनत गणमान्य श्रेष्ठियों और श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूज्य अंतिम मति माताजी के चरणों में अपनी भावभीनी विनयांजलि व अंजलि अर्पित की।