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जहरीले कफ सिरप से देश में हड़कंप: अब तक 23 बच्चों की मौत, सुप्रीम कोर्ट में जांच की मांग, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Tuesday, October 7, 2025

मुंबई, 07 अक्टूबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीला कफ सिरप पीने से अब तक 23 बच्चों की जान जा चुकी है। इनमें मध्य प्रदेश में 2 सितंबर से 19 और राजस्थान में 4 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और पंजाब सरकारों ने इस सिरप की बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें एडवोकेट विशाल तिवारी ने मामले की सीबीआई जांच कराने और देशभर में दवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। याचिका में कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि सरकार को एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया जाए और जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज करें। इधर, तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कंपनी कांचीपुरम में स्थित है और उसे पांच दिन के भीतर जवाब देने का आदेश दिया गया है।

वहीं, गुजरात की दो कंपनियों के सिरप में भी जहरीले रसायन डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) की अत्यधिक मात्रा पाई गई है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से लिए गए 19 सैंपल में से गुजरात की रीलाइफ सिरप और रेस्पिफ्रेस टीआर सिरप में मिलावट की पुष्टि हुई है। इसके बाद प्रदेश में इन दोनों दवाओं की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और गुजरात सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। तमिलनाडु सरकार की जांच टीम ने श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स की कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली फैक्ट्री में 350 से अधिक गंभीर खामियां पाई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फैक्ट्री में योग्य और प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं थे, मशीनें टूटी-फूटी और जंग लगी हुई थीं, सफाई और वेंटिलेशन की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी, साथ ही सुरक्षा उपकरण भी नहीं लगाए गए थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी ने बिना बिल के 50 किलो प्रोपाइलीन ग्लाइकोल खरीदा था और दवा निर्माण में घटिया क्वालिटी के रसायनों का प्रयोग किया गया था।

चेन्नई की सरकारी लैब में जांच के बाद पता चला कि कांचीपुरम की यूनिट में बने कोल्ड्रिफ सिरप के बैच नंबर SR-13 में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जिससे यह बैच पूरी तरह जहरीला साबित हुआ। इस रसायन की थोड़ी सी मात्रा भी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, उसी कंपनी की अन्य चार दवाएं—रेस्पोलाइट D, GL, ST और हेप्सैंडिन सिरप—मानक गुणवत्ता की पाई गई हैं। यह मामला अब देशभर में दवाओं की गुणवत्ता और उनके नियमन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों पर अब यह जिम्मेदारी है कि दवा निर्माण और वितरण से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।


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