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भारतीय मुद्रा बाजार में दबाव: विदेशी फंडों की निकासी और डॉलर की मांग से रुपया 96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद

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Posted On:Thursday, July 16, 2026

मुंबई: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार पूंजी निकासी के कारण भारतीय मुद्रा (रुपया) में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार (15 जुलाई 2026) को अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जहां अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 9 पैसे और टूटकर 96.25 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। इससे पिछले मंगलवार को भी भारतीय मुद्रा में 48 पैसे की विखंडनकारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसने बाजार के रणनीतिक विन्यास को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

इस मुद्रा संकट के सांख्यिकी आंकड़ों और कारोबारी रुझानों पर गौर करें तो आज सुबह सत्र की शुरुआत काफी सकारात्मक रही थी। रुपया कल के बंद स्तर से 13 पैसे की बढ़त के साथ 96.12 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ ही समय में मजबूत होकर 96.05 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, दोपहर के सत्र में तेल आयातकों और बहुराष्ट्रीय बैंकों द्वारा डॉलर की आक्रामक लिवाली शुरू करने से रुपये पर भारी दबाव मुस्तैद हो गया, जिसके चलते यह गिरकर 96.35 प्रति डॉलर के इंट्रा-डे निचले स्तर तक चला गया। अंत में, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर सूचकांक (Dollar Index) में आई मामूली नरमी ने एक सुरक्षा कवच की तरह काम किया, जिसने रुपये को और अधिक विखंडनकारी गिरावट से बचा लिया।

बाजार विशेषज्ञों के नियमों और विलेखों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें अभी भी 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कड़े स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे भारत के व्यापार घाटे को लेकर पुराने विवाद फिर से उभर आए हैं। कच्चे तेल की इस निरंतर तेजी के कारण भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को डॉलर में अधिक भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे घरेलू मुद्रा के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधा सांख्यिकी प्रभाव दिख रहा है। खेल अब पूरी तरह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप, आगामी वैश्विक व्यापारिक लॉजिस्टिक्स और डॉलर सूचकांक के सांख्यिकी संतुलन पर टिका है।


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