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NFHS-6 की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: राजस्थान में देश की सबसे ज्यादा कम उम्र की गर्भवती महिलाएं, बच्चों की सेहत पर भी संकट

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Posted On:Wednesday, June 3, 2026

राजस्थान में बाल विवाह (Child Marriage) और कम उम्र में शादी होना एक ऐसी सामाजिक कुरीति है, जो लंबे समय से राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस विषय पर अक्सर चिंताजनक खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन अब इससे जुड़ा एक और बेहद डरावना और गंभीर पहलू सामने आया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में कम उम्र (किशोरी अवस्था) में गर्भवती होने वाली महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा राजस्थान में है।

साल 2023-24 के दौरान किए गए इस राष्ट्रीय सर्वे के आंकड़ों ने राजस्थान की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में न केवल किशोर गर्भावस्था (Teenage Pregnancy) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, बल्कि नवजात बच्चों की सेहत को लेकर भी कई चिंताजनक संकेत मिले हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था के गिरते ग्राफ पर उठे सवाल

NFHS-6 की रिपोर्ट में राजस्थान के स्वास्थ्य ढांचे और जमीनी हकीकत को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सर्वे के अनुसार, राज्य में प्रमुख स्वास्थ्य मानकों में भारी गिरावट देखी गई है, जो इस प्रकार हैं:

  • किशोर गर्भावस्था दर में वृद्धि: कम उम्र में शादी के कारण लड़कियों के शारीरिक रूप से पूरी तरह परिपक्व होने से पहले ही गर्भवती होने के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है।

  • संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) में कमी: अस्पतालों या सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव के आंकड़ों में गिरावट आई है, जो माता और नवजात शिशु दोनों की जान के लिए बेहद जोखिम भरा है।

  • टीकाकरण (Vaccination) का गिरता स्तर: बच्चों को समय पर मिलने वाले जरूरी टीकों के कवरेज में कमी दर्ज की गई है।

  • बच्चों के स्वास्थ्य में गिरावट: कुपोषण और उचित स्वास्थ्य देखभाल न मिलने के कारण बच्चों के समग्र स्वास्थ्य का स्तर नीचे गिरा है।

सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा, सरकार से हस्तक्षेप की मांग

इन बेहद निराशाजनक और चिंताजनक नतीजों के सामने आने के बाद राज्य के सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों में भारी आक्रोश है। राजस्थान के 50 से अधिक सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर राज्य सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था सीधे तौर पर महिलाओं के मानवाधिकारों, उनकी शिक्षा और उनके जीवन के अधिकार पर कुठाराघात है। जब तक सरकार जमीनी स्तर पर जाकर स्वास्थ्य और जागरूकता अभियानों को कड़ाई से लागू नहीं करेगी, तब तक मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को रोक पाना नामुमकिन होगा। सरकार को इस रिपोर्ट को एक चेतावनी (Wake-up Call) की तरह लेना चाहिए ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।


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