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जिनेवा में बोले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, AI से हेल्थ सेक्टर में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

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Posted On:Friday, May 22, 2026

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (79th World Health Assembly) में वैश्विक मंच पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भारत का विज़न पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके सुरक्षित उपयोग के लिए मजबूत कानून, नैतिक निगरानी (Ethical Oversight) और समानता बेहद जरूरी है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंच सके।


डिजिटल इंडिया से 'आयुष्मान भारत' तक का सफर

स्वास्थ्य मंत्री ने वैश्विक नेताओं के सामने भारत के डिजिटल हेल्थ सफर का खाका प्रस्तुत किया:

  • मजबूत नींव (2015): भारत ने साल 2015 में 'डिजिटल इंडिया' अभियान के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण की मजबूत नींव रखी थी।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017): साल 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में एक ऐसे डिजिटल और आपस में जुड़े हेल्थ इकोसिस्टम की कल्पना की गई थी, जो मरीजों और डॉक्टरों को एक मंच पर लाए।

  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (2021): इसी दूरदर्शी सोच के तहत साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों के स्वास्थ्य डेटा (Health Data) को पूरी तरह सुरक्षित और उनकी सहमति (Consent-based) के आधार पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है।


भारत की 'SAHI' नीति और 'BODH' प्लेटफॉर्म

जेपी नड्डा ने कहा कि सिर्फ डेटा इकट्ठा करना और डिजिटलीकरण करना काफी नहीं है; AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए कड़े नियम होने चाहिए। इस दिशा में उन्होंने भारत के दो बड़े कदमों का जिक्र किया:

  • SAHI (स्ट्रेटेजी फॉर एआई इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया): फरवरी 2026 में लॉन्च हुई इस रणनीति को भारत की 'हेल्थ AI नीति' का एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। यह 'ग्लोबल साउथ' (Global South) से आने वाली पहली ऐसी व्यापक रणनीति है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में AI को पारदर्शी, नैतिक और जनहित में लागू करने पर जोर देती है।

  • BODH प्लेटफॉर्म: भारत 1.4 अरब (140 करोड़) की विशाल आबादी, 22 आधिकारिक भाषाओं और विविध स्वास्थ्य चुनौतियों वाला देश है। ऐसे में AI के सही क्रियान्वयन के लिए भारत ने BODH प्लेटफॉर्म तैयार किया है। यह प्लेटफॉर्म इस बात की कड़ाई से जांच करेगा कि कोई भी AI सिस्टम भारत की विविध परिस्थितियों और अलग-अलग जेनेटिक्स के लोगों पर सटीक, सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है या नहीं।


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