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भविष्य की तकनीक: नीति आयोग की रिपोर्ट में भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने का रोडमैप जारी, 2035 तक 150 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य

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Posted On:Saturday, May 30, 2026

नई दिल्ली: देश की रणनीतिक स्वायत्तता और औद्योगिक तरक्की को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से नीति आयोग ने भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र को लेकर एक बेहद दूरदर्शी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। 'फ्यूचर ऑफ इंडियाज सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री' शीर्षक वाली इस विशेष रिपोर्ट को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया। इस नीतिगत दस्तावेज में चेतावनी दी गई है कि यदि भारत ने आने वाले दशक में चिप निर्माण के क्षेत्र में त्वरित, निरंतर और अनुशासित कदम नहीं उठाए, तो देश की तकनीकी आयात निर्भरता खतरनाक स्तर तक बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए यह महज एक व्यापारिक अवसर नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में एक अनिवार्य केंद्र के रूप में स्थापित होने का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मौका है।

नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब द्वारा तैयार किए गए इस 10-वर्षीय वृहद ब्लूप्रिंट में वर्ष 2035 तक देश के भीतर 120 से 150 अरब अमेरिकी डॉलर के विशाल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने भारत को वेफर फैब्रिकेशन की वैश्विक रेस में पीछे से भागने के बजाय अपना खुद का एक स्वतंत्र मार्ग तय करने की सलाह दी है। इसके तहत देश को निकट भविष्य में परिपक्व नोड्स (Mature Nodes), स्पेशलिटी एनालॉग, मिक्स्ड-सिग्नल चिप्स तथा सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) और गैलियम नाइट्राइड (GaN) जैसे अत्याधुनिक वाइड-बैंडगैप पदार्थों के वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह रणनीतिक चिप्स भारत के ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगे। इसके साथ ही, भारत को अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी चिप डिजाइनिंग प्रतिभा और कुशल कार्यबल का लाभ उठाते हुए एडवांस्ड पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए।


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