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बुजुर्गों और निराश्रित महिलाओं के लिए 'मिनिमम पेंशन' पर सरकार का बड़ा बयान: संसद में साफ हुआ, फिलहाल ऐसी किसी योजना का प्रस्ताव नहीं

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Posted On:Saturday, July 25, 2026

देश के वरिष्ठ नागरिकों, विशेष तौर पर वृद्ध और बेसहारा महिलाओं के लिए न्यूनतम पेंशन की मांग को लेकर संसद में एक बार फिर गंभीर चर्चा हुई है। राज्यसभा में सरकार से यह सीधा सवाल किया गया था कि क्या देश के सभी नागरिकों के लिए ‘मिनिमम पेंशन फॉर ऑल’ के नाम से किसी नई योजना को शुरू करने पर विचार किया जा रहा है? इस पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए यह साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी किसी भी योजना को लाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

संसद में क्या उठाया गया था सवाल?

गत 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा सांसद आर. गिरिराजन ने सरकार से औपचारिक रूप से यह सवाल पूछा था कि क्या सरकार बुजुर्गों और खासकर वृद्ध तथा निराश्रित महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा और सहायता प्रदान करने के लिए किसी न्यूनतम पेंशन योजना की रूपरेखा तैयार कर रही है। उन्होंने इस संबंध में सरकार के आगामी कदमों की जानकारी भी मांगी थी।

सरकार की ओर से क्या मिला जवाब?

श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपने एक लिखित उत्तर में संसद को बताया कि वर्तमान में सरकार के पास 'मिनिमम पेंशन फॉर ऑल' जैसी कोई योजना शुरू करने का विचार नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है:

  • सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020: इस नए कानून के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों (unorganized sector workers), गिग वर्कर्स (gig workers) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा विस्तृत करने का विशेष प्रावधान किया गया है।

  • सोशल सिक्योरिटी फंड: इस कानून के अंतर्गत एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष (Social Security Fund) बनाने की व्यवस्था की गई है, जिससे पात्र और जरूरतमंद श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय मदद पहुंचाई जा सके।

  • पंजीकरण की व्यवस्था: कोड की धारा 113 के तहत असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के अनिवार्य पंजीकरण का भी प्रावधान है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।

सरकार के इस जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि सार्वभौमिक न्यूनतम पेंशन योजना के बजाय अभी फोकस सामाजिक सुरक्षा संहिताओं और लक्षित कल्याणकारी फंडों के जरिए श्रमिकों को सुरक्षा देने पर है।


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