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पैदा कम हो रहे, मर ज्यादा रहे… केरल में हर साल घट रही हिंदुओं की आबादी, ईसाइयों का भी हाल ठीक नहीं

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Posted On:Thursday, June 11, 2026

केरल के अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग (Economics and Statistics Department) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने राज्य के जनसांख्यिकीय (Demographic) परिदृश्य को लेकर एक नई और चिंताजनक बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में हिंदू और ईसाई समुदायों के भीतर मरने वाले लोगों की संख्या, जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या से अधिक हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन दोनों धर्मों में ‘नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट’ (NGR) देखी जा रही है, जिसके कारण इन समुदायों की जनसंख्या प्राकृतिक रूप से धीरे-धीरे घट रही है।

क्या होती है 'नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट' (NGR)?

सरल शब्दों में कहें तो 'नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट' का अर्थ यह है कि जब किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय में एक निश्चित समय (जैसे एक साल) के भीतर होने वाली मौतों का आंकड़ा, वहां पैदा होने वाले बच्चों की संख्या को पार कर जाता है, तो उसे नेगेटिव ग्रोथ माना जाता है। ऐसे में बिना किसी पलायन (Migration) के भी उस समुदाय की आबादी अपने आप कम होने लगती है।

आंकड़ों में गिरावट की भयावहता

सांख्यिकी विभाग के डेटा के अनुसार, हिंदुओं और ईसाइयों में यह गिरावट कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है, बल्कि यह साल दर साल गहराता जा रहा है:

  • हिंदू समुदाय: हिंदुओं में 'नेचुरल ग्रोथ रेट' पहली बार साल 2022 में नेगेटिव (-0.080%) दर्ज की गई थी। साल 2023 के ताजा आंकड़ों में यह स्थिति और खराब होकर -0.115% पर पहुंच गई है। यह लगातार दूसरा साल है जब हिंदुओं की आबादी प्राकृतिक रूप से घटी है।

  • ईसाई समुदाय: ईसाई समुदाय इस मामले में हिंदुओं से भी आगे है। यह समुदाय साल 2021 (-0.095%) से ही लगातार नेगेटिव दायरे में बना हुआ है। साल 2023 में ईसाई समुदाय की NGR -0.084% दर्ज की गई, जो लगातार तीसरे साल गिरावट को दर्शाती है।

मुस्लिम समुदाय में ग्रोथ पॉजिटिव, कुल आबादी पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक तरफ हिंदू और ईसाई समुदायों की आबादी घट रही है, वहीं राज्य में केवल मुस्लिम समुदाय ही ऐसा है जहां जन्म लेने वालों की संख्या, मरने वालों की संख्या से अधिक बनी हुई है। इसी वजह से साल 2023 में केरल की कुल ओवरऑल नेचुरल ग्रोथ रेट मामूली रूप से पॉजिटिव (0.249%) रही है, जिससे राज्य की कुल जनसंख्या में अभी थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी दिख रही है।

2041 तक घट जाएगी पूरे केरल की जनसंख्या!

जनसांख्यिकीय और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में शिक्षा, देर से शादी, और जीवन स्तर के ऊंचे होने के कारण सभी समुदायों में जन्म दर (Birth Rate) लगातार गिर रही है। यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले 15-20 सालों में केरल की सामाजिक और राजनीतिक संरचना पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि साल 2041 के आसपास पूरे केरल राज्य की कुल जनसंख्या बढ़ने के बजाय स्थायी रूप से घटने लगेगी।


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