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भोपाल '90 डिग्री ब्रिज' विवाद, मध्य प्रदेश सरकार ने 7 निलंबित इंजीनियरों को किया बहाल, विभागीय जांच रहेगी जारी

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Posted On:Saturday, May 9, 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बहुचर्चित '90 डिग्री ब्रिज' (ऐशबाग आरओबी) मामले में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए निलंबित किए गए सात इंजीनियरों को बहाल कर दिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री राकेश सिंह ने प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह द्वारा प्रस्तुत बहाली प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है।

बहाली और नई पदस्थापना

इन सभी अधिकारियों को 23 जून 2025 को निर्माण में तकनीकी लापरवाही और डिजाइन संबंधी त्रुटियों के आरोपों के बाद निलंबित किया गया था। बहाली के बाद इन इंजीनियरों को वर्तमान में ईएनसी (ENC) कार्यालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए गए हैं। बहाल किए गए अधिकारियों में दो तत्कालीन प्रभारी मुख्य अभियंता (Chief Engineers) भी शामिल हैं। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि बहाली का अर्थ क्लीन चिट नहीं है; कुछ अधिकारियों के विरुद्ध गहन विभागीय जांच अभी भी जारी रहेगी।

जांच का दायरा और तकनीकी निष्कर्ष

ब्रिज डिवीजन से जुड़े तत्कालीन प्रभारी मुख्य अभियंता जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उपयंत्री उमाशंकर मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच चलती रहेगी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ऐशबाग ब्रिज का कोण वास्तव में 90 डिग्री न होकर 119 डिग्री था। निर्माण के दौरान दोनों तरफ के स्लैब को सीधी रेखा में जोड़ने के कारण सही 'कर्व' नहीं बन पाया, जिससे यातायात में समस्या उत्पन्न हुई। इसके अलावा, रेलवे क्षेत्र में तकनीकी मानकों के विपरीत पिलर निर्माण को भी गंभीर त्रुटि माना गया है।

दूसरी ओर, डिजाइन विंग से जुड़े संजय खांडे, शबाना रज्जाक और शानुल सक्सेना को बिना विभागीय जांच के बहाल किया गया है, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षण में डिजाइन संबंधी उनके तर्कों को वैध पाया गया।


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