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राजेश खन्ना के 'आशीर्वाद' बंगले को 'भूतिया' बताने पर हाईकोर्ट सख्त, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को लगाई रोक

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Posted On:Thursday, July 30, 2026

मुंबई। बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना के प्रतिष्ठित बंगले 'आशीर्वाद' को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मीडिया संस्थानों, वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे इस संपत्ति को "भूतिया", "शापित" या "अशुभ" जैसे शब्दों से जोड़कर कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित न करें। न्यायालय ने माना कि इस प्रकार के दावे बिना ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

यह मामला बंगले के वर्तमान मालिक व्यवसायी शशि शेट्टी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत के समक्ष पहुंचा। याचिका में कहा गया कि कई ऑनलाइन लेखों, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में इस संपत्ति को अंधविश्वास से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि पुराना बंगला काफी पहले हटाया जा चुका है और उसकी जगह नया आवास निर्मित हो चुका है। इसके बावजूद संपत्ति को आज भी 'आशीर्वाद' के नाम से पहचाना जाता है, जिससे इस तरह की खबरों का सीधा असर वर्तमान मालिक की छवि पर पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विवादित सामग्री प्रकाशित करने वाले पक्ष अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसे में न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी ऐतिहासिक या चर्चित संपत्ति को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में स्वतः स्वीकार्य नहीं माना जा सकता, विशेषकर जब उससे किसी की प्रतिष्ठा प्रभावित होती हो।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश डिजिटल मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है कि तथ्यहीन और अंधविश्वास आधारित सामग्री प्रकाशित करने से पहले जिम्मेदारी और सत्यता का ध्यान रखना आवश्यक है। न्यायालय का अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा, जहां मामले पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।


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