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"भूख हड़ताल खत्म, अब जवाबदेही की शुरुआत": परीक्षा सुधारों को लेकर सोनम वांगचुक का बड़ा संदेश

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Posted On:Friday, July 24, 2026

भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की शिक्षा प्रणाली और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू की गई अपनी 26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल आखिरकार 23 जुलाई को समाप्त कर दी। हालांकि, अनशन समाप्त करने के तुरंत बाद उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह लड़ाई का अंत नहीं, बल्कि व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की एक नई शुरुआत है।

जंतर-मंतर से सोशल मीडिया तक संदेश

भूख हड़ताल खत्म करने के अगले दिन सुबह सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने देशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा:

"भूख हड़ताल भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही (Accountability) तय करने का असली काम अब शुरू हो रहा है।"

उन्होंने कहा कि देश में बार-बार लीक होते पेपर, परीक्षाओं में गड़बड़ियां और बिगड़ती परीक्षा प्रणाली से लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संसद में चर्चा का मिला आश्वासन

सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्हें सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से यह ठोस आश्वासन मिला है कि भारतीय संसद में खराब होती परीक्षा प्रणाली और उसमें जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

विभिन्न दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनके इस अभियान को अपना समर्थन दिया और यह माना कि देश के परीक्षा तंत्र में सुधार करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?

पिछले कुछ समय से देश में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं में भारी निराशा देखने को मिली है। सोनम वांगचुक के इस 26 दिवसीय अनशन ने देश का ध्यान इस ओर खींचा:

  • युवाओं के भविष्य की सुरक्षा: पारदर्शी और लीक-मुक्त परीक्षा प्रणाली की मांग।

  • प्रशासनिक जवाबदेही: गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार तंत्र और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।

  • शिक्षा क्षेत्र में सुधार: रटंत प्रणाली से हटकर व्यावहारिक और मजबूत एजुकेशन सिस्टम का निर्माण।

वांगचुक ने उम्मीद जताई है कि संसद के आगामी सत्र में सभी दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के छात्रों के हित में इस गंभीर मुद्दे पर एक ठोस नीति तैयार करेंगे।


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